3 मई और 3 दिग्गज मुख्यमंत्री! अशोक गहलोत, उमा भारती और रघुवर दास का जन्मदिन आज; समर्थकों से मांगा ये खास तोहफा
3 May: 3 मई को देख की राजनीति के 3 'दिग्गजों' का जन्मदिन है। जानें राजस्थान के जादूगर गहलोत, फायरब्रांड उमा भारती और रघुवर दास की सियासी यात्रा और गहलोत का अनोखा 'तोहफा' के बारे में पढ़ें उनका सपर।
- Written By: प्रिया जैस
अशोक गहलोत - उमा भारती - रघुबर दास (सौजन्य-IANS)
3 May Birthday Special: 3 मई देश की राजनीति में एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन तीन प्रमुख मुख्यमंत्रियों का जन्मदिन होता है। इनमें राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती शामिल हैं। आम जनता से गहराई से जुड़े हुए, ये तीनों ही नेता अपने समय के जमीनी नेता माने जाते थे।
अशोक गहलोत को न केवल राजस्थान की राजनीति का ‘जादूगर’ कहा जाता है, बल्कि वे अपनी फ़िटनेस के लिए भी मशहूर हैं। उमा भारती को उनकी हिंदुत्व वाली छवि और एक तेज़-तर्रार नेता के तौर पर जाना जाता है। वहीं, रघुबर दास का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ लंबे समय से जुड़ाव रहा है। इस बार, अपने जन्मदिन के मौके पर, अशोक गहलोत ने अपने समर्थकों से एक अनोखा तोहफ़ा माँगा है। तो आइए, हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
अशोक गहलोत
3 मई को जन्मे राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत को राजनीति में अपनी सादगी और जमीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। अशोक गहलोत तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके है। अशोक गहलोत 1998 से 2003 तक पहली बार मुख्यमंत्री रहे। दूसरी बार 2008 से 2013 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे और तीसरी बार 2018 से 2023 तक फिर से मुख्यमंत्री रहे।
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राजनीति में अपनी गहरी समझ और सूझबूझ और जमीनी पकड़ के कारण उन्हें ‘राजनीति का जादूगर’ भी कहा जाता है। वे जोधपुर लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद चुने गए। 1980, 1984, 1991, 1996 और 1998 में उन्हें सांसद की भूमिका निभाने का मौका मिला। उन्होंने केंद्र सरकार में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पी.वी. नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री काल में केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
अशोक गहलोत ने मांगा खास तोहफा
इस बार अशोक गहलोत ने अपने जन्मदिन से पहले अपने समर्थकों से एक खास तोहफे की मांग की है। उन्होंने 3 दिन पहले ही अपने सोशल मीडिया के जरिए एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस बार उनके जन्मदिन पर समर्थक उनसे मिलने न आए। उन्होंने कहा कि खासकर दूर दराज से आने वाले समर्थक इतनी गर्मी में उन्हें शुभकामनाएं देने न आए।
तेज गर्मी को देखते हुए अशोक गहलोत ने यह मांग की और कहा कि ऐसे मौके पर आप खुद आएं और मैसेज भेजे, वे काफी रहेंगे। यदि कोई उपहार देना चाहता है तो वे उसकी जगह लोगों के लिए पानी का बंदोबस्त जरूर करें। यही सच्ची सेवा और उपहार होगा।
उमा भारती
उमा भारती का जन्म 3 मई 1959 को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के डूंडा ग्राम में एक किसान परिवार में हुआ था। उमा भारती ने 6वीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही उन्हें धार्मिक ग्रंथों और महाकाव्यों में रुचि रही है। वे एक साध्वी हैं और हमेशा ही भगवा वस्त्र धारण करती हैं। उमा भारती 8 दिसंबर 2003 से 23 अगस्त 2004 तक मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर चुकी है। उन्होंने हुबली दंगों में गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद इस्तीफा दे दिया था।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री (2014-2017) और बाद में पेयजल और स्वच्छता मंत्री (2017-2019) का कार्यभार संभाला। पहली बार 1989 में वे खजुराहो से सांसद चुनी गईं थी और 1991, 1996 और 1998 में भी इसी सीट से जीत हासिल की। 1999 में उन्होंने भोपाल और 2014 में झांसी सीट में हाथ आजमाया, जहां से उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता।
1990 के दशक में उमा भारती ने राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम किरदार निभाया। “राम-लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे” उमा भारती ने दिया था, जो जनता के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। वे भाजपा से जुड़ी रही हैं, हालांकि 2005 में अनुशासनहीनता के कारण उन्हें निकाल दिया गया, जिसके बाद उन्होंने ‘भारतीय जनशक्ति पार्टी’ बनाई और 2011 में वे बीजेपी में लौट आईं।
रघुवर दास
3 मई 1955 को जमशेदपुर में जन्मे रघुवर दास भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ राजनेता हैं। इन्होंने झारखंड के छठे मुख्यमंत्री और ओडिशा के राज्यपाल के रूप में कार्य किया हैं। झारखंड राज्य के इतिहास में अपना 5 साल का कार्यकाल (2014-2019) पूरा करने वाले पहले मुख्यमंत्री बने। वे झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री भी हैं। अक्टूबर 2023 में उन्हें ओडिशा का 26वां राज्यपाल नियुक्त किया गया था। लेकिन उनका मन राजनीति में लगा था। दिसंबर 2024 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में लौटने की इच्छा जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
