बिहार के वो 2 जिले…जो पलट देते हैं चुनावी बाजी, 2020 दोहराने चले NDA को रोक पाएगा महागठबंधन?
Bihar Politics: 243 विधानसभा सीटों वाले बिहार में बहुमत का आंकड़ा 122 है। ऐसे अगर कोई पार्टी या गठबंधन किसी विशेष क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करता है, तो उसके लिए सत्ता के करीब पहुंचना आसान हो जाता है।
- Written By: अभिषेक सिंह
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Bihar Asembly Elections: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान हो रहा है, जिसका पहला चरण आज है। 243 विधानसभा सीटों वाले बिहार में बहुमत का आंकड़ा 122 है। ऐसे अगर कोई पार्टी या गठबंधन किसी विशेष क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करता है, तो उसके लिए सत्ता के करीब पहुंचना आसान हो जाता है।
एनडीए को मिथिला के दो जिलों मधुबनी और दरभंगा से भी ऐसी ही उम्मीदें हैं। इन दो जिलों में ही 20 विधानसभा सीटें हैं, और भाजपा और उसके सहयोगियों को पारंपरिक रूप से इन क्षेत्रों से लाभ होता रहा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में, एनडीए ने 20 में से 17 सीटें जीती थीं, जबकि महागठबंधन तीन सीटों पर ही सिमट गया था।
2020 दोहराने की फिराक में NDA
राजद ने दरभंगा ग्रामीण, मधुबनी सदर और लौकहा सीटें जीतीं। इस बार, एनडीए यहां अपने 2020 के प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश कर रहा है। उसका मानना है कि यहां 15 से ज्यादा सीटें जीतने से अच्छी संभावनाएं पैदा होंगी। सिर्फ इन दो जिलों में ज्यादा सीटें जीतने से संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं।
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इसलिए दी जा रही थी सौगातें
केंद्र और राज्य सरकारों ने इस क्षेत्र के लिए मखाना बोर्ड सहित कई घोषणाएं की हैं। यह घोषणा पूरे देश को मखाना की आपूर्ति करने वाले मिथिला क्षेत्र के लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, भाजपा ने हमेशा यहां की सामाजिक गतिशीलता को ध्यान में रखा है।
मखाना बोर्ड से लेकर मिथिला हाट तक, कई प्रयासों का श्रेय जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को जाता है। इसके अलावा, भाजपा यहां पारंपरिक रूप से मज़बूत है। जदयू और भाजपा के बीच यह सहयोग मिथिला में एनडीए को बहुत मज़बूत बनाता है।
आरजेडी भी कर रही कड़ी मेहनत
एक भाजपा नेता ने बताया कि पिछले एक साल में प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। बजट में मखाना बोर्ड के गठन की भी घोषणा की गई थी। इसका असर मिथिला में देखा जा सकता है। राजद भी यहां कड़ी मेहनत कर रही है, वहीं भाजपा के मज़बूत जनाधार से भगवा खेमा उत्साहित है।
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राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव ने अलीनगर सीट से मैथिली ठाकुर के खिलाफ ब्राह्मण उम्मीदवार विनोद मिश्रा को मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने जाले सीट से ऋषि मिश्रा को मैदान में उतारा है। पिछली बार इस सीट से एक मुस्लिम उम्मीदवार मस्कूर उस्मानी को चुना गया था।
स्थानीय समीकरणों का रखा है ध्यान
इस बार राजद और कांग्रेस दोनों ने स्थानीय समीकरणों के आधार पर टिकट बांटे हैं। यह एकमात्र ऐसा इलाका है जहां ब्राह्मणों की अच्छी खासी आबादी है, इसलिए दोनों पार्टियां उन्हें मौका दे रही हैं। इसके अलावा, महागठबंधन ओबीसी, दलितों और मुसलमानों को लुभाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।
