ममता बनर्जी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव
Bihar Assembly Election Results: बिहार चुनाव के नतीजे शुक्रवार को सामने आए, और इन नतीजों ने तमाम राजनीतिक अनुमानों को ध्वस्त कर दिया है। बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आई है। अब तक के नतीजों के अनुसार, एनडीए का आंकड़ा 200 सीटों के पार जाता हुआ दिख रहा है। एनडीए को ऐतिहासिक जीत मिली है, जबकि महागठबंधन का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। एनडीए के पक्ष में इस तरह की आंधी चली है कि महागठबंधन की सीटों का आंकड़ा 30 के नीचे चला गया है। महागठबंधन में शामिल सभी दलों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है, जहां कांग्रेस की सीटें 5 से भी कम रह गईं, वहीं मुकेश सहनी की पार्टी भी खाता नहीं खोल पाई।
नतीजों पर गौर करें तो बिहार में लगातार दूसरी बार कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ने से सहयोगी दलों को क्या फायदा हुआ है और दूसरी ओर यह भी प्रश्न है कि कांग्रेस को इस गठबंधन से आखिर क्या मिला। बिहार के बाद बंगाल और यूपी के चुनाव होने हैं। बंगाल में भले ही ममता बनर्जी अकेले चुनाव लड़ें, लेकिन कांग्रेस से गठबंधन की चर्चा अक्सर होती रही है। वहीं उत्तर प्रदेश में, अखिलेश यादव की सपा और कांग्रेस का गठबंधन है।
बिहार चुनाव के नतीजे देखने के बाद यह सवाल मन में आता है कि महागठबंधन में शामिल दलों को अलग-अलग लड़े होने पर क्या फायदा नहीं होता। बिहार की राजनीति को थोड़ी बहुत समझने वाले यह कह सकते हैं कि अगर ये दल अलग-अलग लड़े होते तो नतीजे शायद इतने खराब नहीं होते। यह लगातार दूसरा चुनाव है जब कांग्रेस का प्रदर्शन बिहार में बेहद खराब रहा है, और अब यह सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस को इस गठबंधन से कोई खास लाभ मिला। नतीजों के बाद बिहार की राजनीति को समझने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग सीटों पर चुनाव लड़ने से कम से कम कार्यकर्ताओं का मनोबल तो बना रहता।
पिछले बिहार चुनाव में भी कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन को लेकर आरजेडी में सवाल उठे थे, लेकिन इस बार आरजेडी भी इस स्थिति में नहीं है कि वह कांग्रेस पर सीधे आरोप लगाए।
बिहार चुनाव के नतीजों पर सबसे करीबी नजर सपा मुखिया अखिलेश यादव की रही होगी। यूपी का पड़ोसी राज्य बिहार है और यहाँ अखिलेश यादव ने महागठबंधन के पक्ष में प्रचार भी किया था। अब बिहार के नतीजों के बाद अखिलेश यादव को झटका तो जरूर लगा होगा। इसके अलावा कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर उनके मन में सवाल भी उठ रहे होंगे। 2027 में यूपी में चुनाव है, और यह चुनाव अखिलेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा ने मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन किस तरह काम करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। यूपी में कांग्रेस के लिए खोने को कुछ नहीं है, लेकिन दोनों दलों के लिए यह चुनौती होगी कि वे एक साथ कैसे आगे बढ़ते हैं।
अगले साल बंगाल में विधानसभा चुनाव हैं। इस राज्य में पहली बार बीजेपी ने अपना पूरा जोर लगा दिया है, लेकिन अब तक उसे कोई खास सफलता नहीं मिली। हालांकि बिहार के नतीजों ने बंगाल के बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं में जोश भर दिया है। पिछली बार बीजेपी को लगा था कि बंगाल में वह सफलता हासिल करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस जीत के बाद ममता बनर्जी विपक्ष में एक मजबूत नेता के रूप में उभरकर सामने आईं।
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2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन में रहते हुए भी कांग्रेस से गठबंधन नहीं किया था। इसके बाद कई बार यह सवाल उठता रहा कि क्या ममता बनर्जी और कांग्रेस अगले विधानसभा चुनाव में गठबंधन करेंगे। अब बिहार के नतीजों के बाद ममता बनर्जी को इस गठबंधन को लेकर जो कन्फ्यूजन था, वह शायद दूर हो चुका होगा।