मुकेश सहनी और तेजस्वी यादव (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bihar Election Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के ताजा रुझानों में एनडीए जीत की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जबकि महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, एनडीए लगभग 200 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इनमें भाजपा 90 सीटों पर आगे चल रही है और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है।
भाजपा की सहयोगी जदयू 80 सीटों पर आगे है, जिससे गठबंधन को मजबूत स्थिति मिल रही है। एनडीए के अन्य घटक दलों में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 20, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा 4 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। कुल मिलाकर बिहार की जनता ने एक बार फिर एनडीए पर अपना भरोसा जताया है।
वहीं, महागठबंधन रुझानों में पिछड़ता नजर आ रहा है। दोपहर दो बजे तक राजद को 29, कांग्रेस को 5 और भाकपा-माले को 4 सीटों पर बढ़त मिली थी। मुकेश सहनी की पार्टी का खाता अब तक नहीं खुला है। इन नतीजों ने विपक्षी गठजोड़ में चिंता बढ़ा दी है।
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: On #BiharElection2025, AIMIM national spokesperson Waris Pathan says, “We also raised the issue that you (mahagathbandhan) declared a Mallah with 2 per cent of the vote as Deputy Chief Minister. You declare a Yadav with a 14 per cent vote as Chief… pic.twitter.com/m5GULIheZs — ANI (@ANI) November 14, 2025
इसी बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने महागठबंधन पर करारा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि उन्होंने पहले ही चेताया था कि धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा रोकने के लिए सभी को मिलकर लड़ना चाहिए, लेकिन महागठबंधन ने उनकी बात को नजरअंदाज किया।
वारिस पठान ने सवाल उठाया कि महागठबंधन ने केवल दो प्रतिशत वोट वाले मल्लाह समुदाय के नेता को उपमुख्यमंत्री घोषित किया, 14 प्रतिशत यादव आबादी के नेता को मुख्यमंत्री, लेकिन 19 प्रतिशत मुस्लिम आबादी को पूरी तरह अनदेखा किया।
पठान ने कहा कि मुसलमानों को उनकी हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व से वंचित क्यों किया जा रहा है। तेजस्वी यादव द्वारा पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को चरमपंथी कहे जाने पर उन्होंने मांग की कि तेजस्वी को सभी मुसलमानों से माफी मांगनी चाहिए।
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पठान ने दावा किया कि उनकी पार्टी बिहार में मजबूत प्रदर्शन कर रही है और शाम तक नतीजों में यह साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता ने एआईएमआईएम को प्यार, समर्थन और वोटों से नहलाया है। एआईएमआईएम न एनडीए का हिस्सा है और न ही महागठबंधन का, बल्कि स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है। उनका मानना है कि यदि महागठबंधन अहंकार छोड़कर साथ आता, तो सेक्युलर वोटों का बिखराव रोका जा सकता था।