मनेर विधानसभा: लड्डुओं की मिठास और सियासी खटास, क्या जीत का चौका लगा पाएंगे RJD के भाई वीरेंद्र
Bihar Assembly Elections: मनेर की राजनीति में दल-बदल का इतिहास रहा है, लेकिन पिछले एक दशक से यहां राजद का दबदबा कायम है। राजद के दिग्गज नेता भाई वीरेंद्र इस सीट से लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं।
- Written By: मनोज आर्या
बिहार विधानसभा चुनाव 2025, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Maner Assembly Constituency: बिहार की राजनीति में पटना जिले की मनेर विधानसभा सीट एक अनूठी पहचान रखती है। गंगा और सोन नदियों के पवित्र संगम पर बसा यह क्षेत्र, अपने प्रसिद्ध ‘मनेर के लड्डू’ की मिठास के साथ-साथ, पिछले एक दशक से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए एक मजबूत और अभेद्य किला बन चुका है। पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सीट पूरी तरह से यादव समुदाय के वर्चस्व और कड़े राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई है।
राजद का अभेद्य किला मनेर
मनेर की राजनीति में दल-बदल का इतिहास रहा है, लेकिन पिछले एक दशक से यहां राजद का दबदबा कायम है। राजद के दिग्गज नेता भाई वीरेंद्र इस सीट से लगातार तीन बार (2010, 2015, 2020) जीत दर्ज कर चुके हैं और 2025 में जीत का चौका लगाने की तैयारी में हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के निखिल आनंद को 32,917 वोटों के बड़े अंतर से हराकर अपनी पकड़ की मजबूती साबित की थी। मनेर सीट पर यादव समुदाय का वर्चस्व रहा है, और राजद ने इस वोट बैंक को सफलतापूर्वक साधकर ही लगातार जीत हासिल की है, जिससे यह पार्टी का गढ़ बन गई है।
2024 लोकसभा का संकेत: राजद की बढ़ी बढ़त
मनेर का मजबूत राजनीतिक आधार सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं है। 2009 में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को इसी पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र से हार मिली थी, लेकिन उनकी बेटी मीसा भारती ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करके इस क्षेत्र में पार्टी की उपस्थिति को फिर से मजबूत किया।2024 के लोकसभा चुनाव में मनेर विधानसभा क्षेत्र ने राजद को 34,459 वोटों की बड़ी बढ़त दी, जो आगामी नवंबर महीने के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की मजबूत स्थिति का स्पष्ट संकेत है।
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मनेर का इतिहास और सांस्कृतिक विरासत
मनेर की पहचान इसके राजनीतिक समीकरणों से कहीं ज्यादा गहरी है। प्राचीन काल में इसे ‘मनियार मठान’ यानी ‘संगीतमय नगरी’ के नाम से जाना जाता था। माना जाता है कि संस्कृत के महान व्याकरणाचार्य पाणिनि ने अपनी विश्व प्रसिद्ध रचना ‘अष्टाध्यायी’ की रचना से पहले यहीं अध्ययन किया था। आज मनेर शरीफ 13वीं सदी के सूफी संत मखदूम याह्या मनेरी और 16वीं सदी के मखदूम शाह दौलत की दरगाहों के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे इस्लामी शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बनाता है।
मिठास का प्रतीक है मनेर का लड्डू
मनेर की पहचान का सबसे ‘मीठा’ पहलू यहां के प्रसिद्ध ‘मनेर के लड्डू’ हैं। कहा जाता है कि इन लड्डुओं का बेमिसाल स्वाद सोन नदी के मीठे पानी के कारण आता है, जिन्हें शुद्ध घी और अन्य सामग्री से तैयार किया जाता है। एनएच-30 के किनारे इन लड्डुओं की दुकानें लगी रहती हैं और इनकी डिमांड विदेशों तक है। यह मिठाई परंपरा और आधुनिकता के खूबसूरत मेल को दर्शाती है।
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मनेर विधानसभा सीट 2025 में एक बार फिर राजद के गढ़ को बचाने की लड़ाई का गवाह बनेगी, जहां जीत का ‘लड्डू’ किस पार्टी को नसीब होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
