वारिसलीगंज विधानसभा: भाजपा की हैट्रिक की तैयारी, राजद को अब भी पहली जीत का इंतजार
Bihar Assembly Elections: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नवादा की वारिसलीगंज सीट पर भाजपा हैट्रिक लगाने को तैयार है। राजद को अब तक यहां जीत नहीं मिली है। जानें क्या है पूरा समीकरण
- Written By: अमन उपाध्याय
वारिसलीगंज विधानसभा, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Warisaliganj Assembly Constituency: वारिसलीगंज विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बिहार विधान सभा के 243 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है और यह नवादा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। Bihar Politics में यह सीट अपनी अनूठी राजनीतिक कहानी के कारण विशेष महत्व रखती है।
यह वह सीट है जहाँ भाजपा लगातार तीसरी जीत यानी हैट्रिक लगाने की तैयारी में है, जबकि राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी राजद (RJD) का खाता आज तक यहाँ नहीं खुला है।
धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर
वारिसलीगंज की पहचान न केवल राजनीतिक है, बल्कि यह ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों से भी समृद्ध है।
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सूर्य मंदिर: वारिसलीगंज विधानसभा के शाहपुर गांव में स्थित सूर्य मंदिर स्थानीय लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां छठ घाट का विशेष महत्व माना जाता है, जिस कारण महापर्व के मौके पर श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ती है।
प्राचीन मंदिर: नारोमुरार गांव में श्री राम और भगवान शिव को समर्पित 400 साल पुराना ठाकुर वाड़ी मंदिर भी लोगों की आस्था से जुड़ा है। इसके अलावा, दरियापुर पार्वती में अवलोकितेश्वर को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है।
ऐतिहासिक अवशेष: दरियापुर पार्वती, अप्सरह और माफी गांवों में कई प्राचीन अवशेष मिलते हैं। कहा जाता है कि माफी गांव द्वापर युग का है और इसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। दरियापुर पार्वती गांव में कपोतिका बोध बिहार के अवशेष और अप्सरह गांव में राजा आदित्यसेन से जुड़ी धरोहरें इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को दर्शाती हैं।
कृषि और कनेक्टिविटी
वारिसलीगंज की मिट्टी काफी उपजाऊ है, और यहां मुख्य रूप से गेहूं, मक्का और धान की खेती की जाती है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार है। वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र एसएच-83 से जुड़ा हुआ है, जो इसकी कनेक्टिविटी को बेहतर बनाता है। हालांकि, कृषि से जुड़े मुद्दे, जैसे सिंचाई और फसलों का उचित मूल्य, यहाँ के चुनावी एजेंडे में प्रमुख रहते हैं।
राजनीतिक इतिहास: इस सीट पर राजद का शून्य और भाजपा का वर्चस्व रहा है। 1951 में स्थापित इस सीट पर अब तक 17 विधानसभा चुनाव हुए हैं।
कांग्रेस का शुरुआती गढ़: शुरुआती समय में यह विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन 1995 में आखिरी बार कांग्रेस को जीत मिली थी। इसके बाद से न कांग्रेस और न उसके सहयोगी दल चुनाव जीत पाए।
राजद का शून्य: इस सीट का सबसे दिलचस्प राजनीतिक तथ्य यह है कि यहां अब तक राजद का खाता नहीं खुला है। यह नवादा जिले में राजद के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती है।
भाजपा का उदय: पिछले दो चुनावों से भाजपा लगातार जीत रही है और आगामी Bihar Assembly Election 2025 में उसके सामने जीत की हैट्रिक लगाने का मौका है, जिससे यह सीट एनडीए के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है।
2025 का चुनावी मुकाबला
आगामी बिहार चुनाव में वारिसलीगंज विधानसभा पर मुकाबला भाजपा और महागठबंधन के बीच कड़ा होने वाला है।
भाजपा की उम्मीदवार: भाजपा ने वारिसलीगंज से इस बार अरुणा देवी को उम्मीदवार बनाया है, जो पहले भी विधायक रह चुकी हैं और सीट पर अपनी मजबूत पकड़ रखती हैं।
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राजद की उम्मीदवार: राजद ने अनीता को टिकट दिया है। राजद इस बार इस सीट पर पहली जीत दर्ज करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है।
जन सुराज पार्टी: जन सुराज पार्टी ने भी उमेश प्रसाद को मैदान में उतारा है, जिससे मुख्य लड़ाई में तीसरे कोण के उभरने की संभावना है जिसके बाद अरुणा देवी के लिए हैट्रिक लगाना और राजद के लिए पहली बार जीतना इस चुनाव का मुख्य आकर्षण होगा।
