बिहार में आज सम्राट सरकार का टेस्ट लेकिन तेजस्वी के लिए अग्निपरीक्षा! RJD की क्यों बढ़ी हुई हैं धड़कनें?
Bihar Politics: बिहार विधानसभा में आज सम्राट चौधरी सरकार का फ्लोर टेस्ट! बहुमत से ज्यादा चर्चा तेजस्वी यादव की 'अग्निपरीक्षा' की है, क्या इस बार RJD के विधायक एकजुट रहेंगे या फिर होगा कोई नया 'खेला'?
- Written By: अर्पित शुक्ला
सम्राट चौधरी, तेजस्वी यादव (Image- Social Media)
Bihar Assembly Floor Test 2026: बिहार विधानसभा में होने वाला फ्लोर टेस्ट सिर्फ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के बहुमत का परीक्षण नहीं है, बल्कि यह दिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या RJD के विधायक इस बार एकजुट रहेंगे या फिर ‘खेला’ दोहराया जाएगा।
तेजस्वी यादव की चिंता यूं ही नहीं है। 12 फरवरी 2024 के फ्लोर टेस्ट के दौरान उन्होंने ‘खेला’ होने का आरोप लगाया था, लेकिन हकीकत में RJD के कई विधायक पाला बदलकर NDA में चले गए थे। इससे न सिर्फ सरकार गिराने की कोशिश नाकाम रही, बल्कि महागठबंधन की साख को भी नुकसान पहुंचा।
राज्यसभा चुनाव में भी लगा था झटका
इसके बाद राज्यसभा चुनाव में भी महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा, जब कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी। इससे यह संदेश गया कि तेजस्वी अपने विधायकों को एकजुट रखने में संघर्ष कर रहे हैं।
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सिमटी ताकत, बढ़ता दबाव
इस बार महागठबंधन की संख्या घटकर सिर्फ 35 विधायकों तक रह गई है। ऐसे में हर विधायक की अहमियत और बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फ्लोर टेस्ट में सरकार गिराना तेजस्वी का मुख्य लक्ष्य नहीं, बल्कि अपने विधायकों को टूटने से बचाना उनकी सबसे बड़ी चुनौती है।
| पार्टी | विधायकों की संख्या |
|---|---|
| आरजेडी | 25 |
| कांग्रेस | 6 |
| सीपीआईएमएल | 2 |
| सीपीआईएम | 1 |
| आईआईपी | 1 |
| कुल | 35 |
क्यों अहम है आज का दिन
चूंकि NDA के पास पहले से ही बहुमत है, इसलिए सम्राट चौधरी सरकार का भरोसा जीतना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में असली लड़ाई संख्या की नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश की है। अगर महागठबंधन एकजुट दिखता है, तो यह तेजस्वी के लिए सकारात्मक संकेत होगा। लेकिन अगर फिर से टूट होती है, तो विपक्ष की कमजोरी उजागर हो सकती है।
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आज का फ्लोर टेस्ट यह भी तय करेगा कि तेजस्वी यादव सिर्फ आक्रामक नेता हैं या मजबूत रणनीतिकार भी। बिहार की राजनीति में इसीलिए कहा जा रहा है कि यह फ्लोर टेस्ट सरकार से ज्यादा तेजस्वी की अग्निपरीक्षा है।
