
बिहार चुनाव में महिलाओं का जादू में जमकर चला
Bihar Election Women candidate Winning Analysis: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में ‘आधी आबादी’ की भागीदारी ने सबका ध्यान खींचा है। इस बार महिलाओं का जादू जमकर चला और 28 महिला प्रत्याशी जीत हासिल कर विधानसभा पहुंची हैं। यह संख्या 2020 के 25 के आंकड़े से बेहतर है। 10 राजनीतिक दलों ने कुल 88 महिलाओं पर भरोसा जताते हुए उन्हें मैदान में उतारा था। यह जीत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में महिलाओं के बढ़ते कद और सामाजिक बदलाव का एक स्पष्ट संकेत भी है।
कुल मिलाकर, चुनावी मैदान में उतरीं 88 महिला प्रत्याशियों में से 28 ने जीत हासिल की, जो लगभग 32% की सफलता दर है। यह बिहार जैसे कठिन राजनीतिक मिजाज वाले राज्य में महिलाओं के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है। इस जीत ने यह भी संदेश दिया है कि पार्टियां अब महिलाओं को केवल ‘प्रतीकात्मक’ उम्मीदवार नहीं मान रहीं, बल्कि उन्हें ‘सत्ता के केंद्र’ में शामिल करने पर भी ध्यान दे रही हैं। यह वृद्धि बिहार की राजनीतिक संस्कृति में धीरे-धीरे हो रहे बदलाव को दर्शाती है।
| पार्टी | 2025 टिकट/जीती | 2025 जीती | 2020 जीती |
|---|---|---|---|
| बीजेपी | 12/10 | 10 | 06 |
| जेडीयू | 13/09 | 09 | 08 |
| राजद | 23/03 | 03 | 07 |
| लोजपा (R) | 06/03 | 03 | 02 |
| हम | 02/02 | 02 | 01 |
| रालोसपा/रालमि | 01/01 | 01 | 01 |
| जनसुराज | 25/00 | 00 | — |
महिला विधायकों के मामले में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) लगभग आगे-पीछे ही रहीं। एनडीए की इन दोनों पार्टियों ने सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवारों को जीत दिलाई। बीजेपी ने 12 महिलाओं को टिकट दिया, जिनमें से 10 ने शानदार जीत दर्ज की, जो सबसे ज्यादा है। वहीं, जदयू ने 13 महिलाओं को मैदान में उतारा, जिनमें से 9 विधायक बनने में सफल रहीं। दूसरी तरफ, लोजपा (रामविलास) ने भी 6 में से 3 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि ‘हम’ पार्टी ने 2 में से 2 और रालोमो ने 1 में से 1 सीट जीतकर शत-प्रतिशत परिणाम दिया।
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इस चुनाव में आरजेडी और कांग्रेस का प्रदर्शन महिला उम्मीदवारों के मामले में बेहद निराशाजनक रहा। आरजेडी ने सबसे ज्यादा 23 महिलाओं को टिकट दिया, लेकिन उनमें से सिर्फ 3 ही जीत पाईं। वहीं, कांग्रेस ने 5 महिला उम्मीदवारों पर दांव लगाया, लेकिन एक का भी खाता नहीं खुल सका। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी 25 महिलाओं को टिकट दिया था, पर कोई भी सफल नहीं हो पाईं। यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि इन महिला उम्मीदवारों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जो बिहार के सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।






