
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Bihar Elections Results: बिहार चुनाव के नतीजे आने में बस कुछ ही घंटे बचे हैं, ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ तस्वीरों और वीडियो ने बड़े नेताओं की नींद उड़ा दी है। आज की रात बिहार के कई बड़े नेताओं की रात मुश्किलों भरी रहने वाली है। ईवीएम से लेकर सरकार बनाने और गिराने तक, हर तरह की योजनाएं बनाई जा रही हैं।
रात के अंधेरे में और बंद दरवाजों के पीछे पटना की सड़कों पर खेल शुरू हो गया है। प्रमुख पार्टियाँ ख़ास तौर पर उन निर्दलीय उम्मीदवारों पर नज़र रखने में लगी हैं जिनके एग्जिट पोल में जीत की भविष्यवाणी की गई है। अब उनके पिछले संबंधों की जांच की जा रही है।
14 नवंबर की सुबह ईवीएम खुलने से पहले 13 नवंबर की रात को वैसे तो मौसम सर्द है लेकिन बिहार का सियासी तापमान हाई हो चुका है। इस गर्मी का असर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी महसूस किया जा रहा है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही खेमों में काफ़ी हलचल है।
एग्जिट पोल के नतीजों के बाद, दोनों गठबंधन अपनी अंतिम रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। दोनों गठबंधन संभावित नतीजों को स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए अपने-अपने “चाणक्य” या सलाहकारों के साथ बंद कमरे में बैठकें करके ए, बी और सी प्लान पर काम कर रहे हैं।
मतगणना केंद्रों की सुरक्षा राजनीतिक दलों, खासकर महागठबंधन और राजद के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। राजद और महागठबंधन के अन्य नेता अपने प्रतिनिधियों के साथ रात भर ईवीएम स्ट्रांग रूम के आसपास निगरानी रख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी अवांछित व्यक्ति या वस्तु स्ट्रांग रूम तक न पहुंच सके।
दोनों गठबंधनों के पार्टी कार्यालयों और वरिष्ठ नेताओं के घरों पर लगातार आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। बूथ स्तर के आंकड़ों की तुलना एग्जिट पोल के नतीजों से की जा रही है। महागठबंधन के नेताओं को भरोसा है कि सत्ता विरोधी लहर एग्जिट पोल को गलत साबित कर देगी। इस बीच एग्जिट पोल के नतीजों से उत्साहित एनडीए नेता सरकार बनाने के लिए बंद कमरे में बैठकें कर रहे हैं।
एनडीए नेता नीतीश कुमार और महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव, दोनों गठबंधनों के शीर्ष नेताओं और करीबी अधिकारियों के साथ बंद कमरों में बैठक कर रहे हैं ताकि हर सीट पर जीत और हार के संभावित कारणों पर चर्चा की जा सके। चूंकि एग्जिट पोल में एनडीए को बढ़त दिखाई गई है, इसलिए दिल्ली में भाजपा नेताओं की भी देर रात तक बैठकें होने की संभावना है।
महागठबंधन के राष्ट्रीय स्तर के नेता दिल्ली में विपक्षी दलों के अपने समकक्षों के संपर्क में हैं। अगर नतीजे त्रिशंकु रहे तो आगे की रणनीति क्या होगी? कौन से नेता पाला बदल सकते हैं? इसलिए दोनों गठबंधनों में इस बात पर चर्चा चल रही है कि बिहार में किन वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया जाए, जो नतीजों के तुरंत बाद विधायकों को एकजुट करने और पार्टी के लिए अनुकूल माहौल बनाने का काम करेंगे।
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सरल शब्दों में कहा जाए तो आज की रात सिर्फ बिहार के नतीजों से एक रात पहले की रात नहीं है, बल्कि सत्ता के दावेदारों के लिए अपनी रणनीतियों और सत्ता के समीकरणों को अंतिम रूप देने का समय है। कल सुबह 8 बजे ईवीएम खुलने के बाद पता चलेगा कि किसकी रणनीति कारगर रही और बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?






