कार की Insurance करनाना है जरूरी। (सौ. Pixabay)
Zero Depreciation Car Insurance: आजकल कार खरीदते समय लोग सिर्फ मॉडल और फीचर्स ही नहीं देखते, बल्कि इंश्योरेंस पॉलिसी का चुनाव भी सोच-समझकर करते हैं। अक्सर खरीदारों के मन में यह सवाल आता है कि जीरो डेप्रिसिएशन (Nil Depreciation) पॉलिसी लें या फिर नॉर्मल इंश्योरेंस। कई बार एजेंट भी इनके बीच का सही अंतर साफ नहीं बताते। ऐसे में सही निर्णय लेने के लिए इन दोनों विकल्पों को विस्तार से समझना जरूरी है।
जीरो डेप्रिसिएशन कवर को एक ऐड-ऑन पॉलिसी माना जाता है। इसके तहत अगर आपकी कार में किसी भी तरह का नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी प्लास्टिक, रबर और फाइबर जैसे सभी पार्ट्स का पूरा खर्च वहन करती है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक्सीडेंट या रिपेयरिंग की स्थिति में आपको अपनी जेब से ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता। यही वजह है कि यह कवर नई और लग्जरी कारों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है। हालांकि, इसका प्रीमियम नॉर्मल इंश्योरेंस की तुलना में अधिक होता है, लेकिन लंबे समय में यह बड़े आर्थिक नुकसान से बचाता है।
सामान्य कार इंश्योरेंस में क्लेम तय करने के लिए डेप्रिसिएशन यानी पार्ट्स की उम्र का हिसाब लगाया जाता है।
ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां जीरो डेप्रिसिएशन कवर को केवल पांच साल तक उपलब्ध कराती हैं। कुछ कंपनियां इसे सात साल तक बढ़ा देती हैं। इसके बाद पुराने वाहनों के लिए यह सुविधा नहीं होती और सिर्फ नॉर्मल इंश्योरेंस ही विकल्प रह जाता है।
ये भी पढ़े: Tata Winger Plus लॉन्च: कमर्शियल सेगमेंट में धमाकेदार एंट्री
अगर आप चाहते हैं कि एक्सीडेंट या नुकसान की स्थिति में रिपेयरिंग का पूरा खर्च बीमा कंपनी उठाए, तो जीरो डेप्रिसिएशन पॉलिसी आपके लिए सबसे बेहतर है। वहीं, अगर आपकी कार पुरानी हो चुकी है या आप कम ड्राइविंग करते हैं, तो नॉर्मल इंश्योरेंस भी सही विकल्प साबित हो सकता है।