Auto market (Source. Freepik)
Passenger Vehicles FADA: देश के ऑटोमोबाइल बाजार में 2025 का साल ग्रामीण इलाकों के नाम रहा। मजबूत ग्रामीण मांग के चलते देशभर के खुदरा बाजारों में बीते साल 2.81 करोड़ से अधिक वाहनों की बिक्री दर्ज की गई। यह आंकड़ा 2024 में बिके 2.61 करोड़ वाहनों की तुलना में 7.71 फीसदी ज्यादा है। खास बात यह रही कि जहां गांवों में वाहनों की बिक्री 12 फीसदी बढ़ी, वहीं शहरी बाजारों में यह बढ़त सिर्फ 8 फीसदी तक सीमित रही।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में कारों समेत यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री 9.7 फीसदी बढ़कर 44.75 लाख यूनिट पर पहुंच गई। एक साल पहले यानी 2024 में यह आंकड़ा 40.79 लाख था। यह इशारा करता है कि कीमतों में राहत और बेहतर फाइनेंसिंग विकल्पों ने ग्राहकों की खरीद क्षमता को मजबूत किया।
फाडा के अध्यक्ष सीएस विग्नेश्वर ने कहा, “2025 का साल दो हिस्सों में बंटा रहा। बजट में प्रत्यक्ष कर राहत और आरबीआई की ब्याज दरों में कटौती जैसे अनुकूल संकेत के बावजूद जनवरी से अगस्त तक बाजार सुस्त बना रहा। लेकिन, जीएसटी दरों में कटौती लागू होने से वाहन बिक्री की तस्वीर बदल गई। वाहनों के दाम घटने से ग्राहकों की धारणा सुधरी और सितंबर से दिसंबर के बीच बिक्री में तेज वृद्धि हुई।”
आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दोपहिया वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 7.24 फीसदी बढ़कर 2.02 करोड़ यूनिट पहुंच गई, जबकि 2024 में यह 1.89 करोड़ थी। वहीं तिपहिया वाहनों की बिक्री 7.21 फीसदी बढ़कर 13.09 लाख यूनिट हो गई। इसके अलावा वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में भी 6.71 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई और यह 10.09 लाख के पार पहुंच गई।
फाडा के मुताबिक, 2025 में बिके यात्री वाहनों में 33 फीसदी हिस्सेदारी CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की रही। CNG कारों की हिस्सेदारी 18 फीसदी से बढ़कर 21 फीसदी हो गई, जबकि ई-वाहनों की हिस्सेदारी 2.4 फीसदी से बढ़कर 4 फीसदी पर पहुंच गई। हालांकि, हाइब्रिड वाहनों की बिक्री 8.7 फीसदी से घटकर 8.2 फीसदी रह गई। पेट्रोल वाहनों की हिस्सेदारी 52 फीसदी से घटकर 49 फीसदी, जबकि डीजल वाहनों की हिस्सेदारी 18 फीसदी पर स्थिर रही।
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आगे के परिदृश्य पर फाडा प्रमुख ने भरोसा जताया कि अगले तीन महीनों में 74.9 फीसदी डीलर बिक्री बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। त्योहारों, शादी के मौसम, रबी की बेहतर फसल और अपेक्षाकृत कम ब्याज दरों से वाहन बाजार को आगे भी मजबूत सहारा मिलने की संभावना है।