Yogi Adityanath Japan Visit (Source. Design)
Yogi Adityanath Japan Visit: उत्तर प्रदेश के लिए आने वाले दिन बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 से 24 फरवरी तक सिंगापुर की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरे का मकसद सिर्फ औपचारिक मुलाकातें नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को निवेश, तकनीक और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है। खासकर निम्न मध्यम वर्ग और युवाओं के लिए यह यात्रा भविष्य में बड़े आर्थिक मौके ला सकती है।
अपने दौरे के दौरान सीएम योगी सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगारत्नम और प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग सहित शीर्ष नेतृत्व से अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के बीच संस्थागत व आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है।
यह यात्रा भारत-सिंगापुर रणनीतिक रोडमैप का हिस्सा है, जिसमें डिजिटलाइजेशन, स्किल डेवलपमेंट और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दी गई है। अगर इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ता है तो प्रदेश में नई फैक्ट्रियां लग सकती हैं और हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
सिंगापुर के बाद मुख्यमंत्री का अगला पड़ाव जापान होगा। यहां वे भविष्य की अत्याधुनिक रेल तकनीक ‘मैग्लेव ट्रेन’ का अनुभव करेंगे। टोक्यो से नागोया के बीच विकसित हो रहे मैग्लेव कॉरिडोर के निरीक्षण के दौरान वे करीब 100 किलोमीटर की यात्रा करेंगे। बताया जा रहा है कि यह ट्रेन रफ्तार पकड़ने के बाद हवा में तैरने लगती है। सुनने में यह भले ही फिल्मी लगे, लेकिन यह आधुनिक तकनीक की वास्तविक उपलब्धि है।
Maglev शब्द Magnetic Levitation से बना है। यह ट्रेन सामान्य ट्रेनों की तरह पहियों के सहारे पटरियों पर नहीं चलती। बल्कि शक्तिशाली चुंबकीय बल के कारण पटरी से कुछ इंच ऊपर हवा में तैरती है। पहियों और पटरी के बीच सीधा संपर्क न होने के कारण घर्षण लगभग शून्य हो जाता है। यही वजह है कि यह ट्रेन 600 किमी प्रति घंटा तक की चौंकाने वाली रफ्तार पकड़ सकती है। ट्रेन के नीचे और ट्रैक पर लगे इलेक्ट्रोमैग्नेट्स एक-दूसरे को धक्का देते हैं और ट्रेन को ऊपर उठाकर आगे की ओर तेजी से खींचते हैं। इसी कारण इसे ‘उड़ने वाली ट्रेन’ भी कहा जाता है।
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सूत्रों के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ इस ट्रेन में 600 किमी प्रति घंटा की टॉप स्पीड पर 100 किमी का सफर तय करेंगे। यह रफ्तार किसी फाइटर जेट को टक्कर देने जैसी मानी जाती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ऐसी तकनीक भविष्य में भारत और उत्तर प्रदेश में आती है, तो सफर का समय घटेगा, उद्योग बढ़ेंगे और आम लोगों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधा मिल सकेगी। यह दौरा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि प्रदेश को हाईटेक भविष्य की ओर ले जाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।