
CNG Car लेनी है तो इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। (सौ. Freepik)
Second Hand CNG: पेट्रोल-डीज़ल महँगा होने के कारण CNG कारों की मांग तेजी से बढ़ी है और सेकंड-हैंड बाजार में भी CNG वेरिएंट की खरीदी जोरों पर है। सस्ती लगने वाली ये खरीद कभी-कभी ‘टाइम बम’ बन सकती है इसलिए खरीदने से पहले कुछ बेसिक लेकिन ज़रूरी चीजें जरूर जांचें। नज़रअंदाज़ करने पर गैस लीकेज, सिलेंडर फेल या कानूनी परेशानी भारी पड़ सकती है।
सबसे पहला सवाल क्या CNG किट फैक्ट्री फिटेड है या बाद में लगवाई गयी (आफ्टर-मार्केट)? फैक्ट्री फिटेड किटों को निर्माता के मानकों के अनुसार डिज़ाइन और टेस्ट किया जाता है, इसलिए वे ज़्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं। यदि किट आफ्टर-मार्केट है, तो उसकी क्वालिटी, ब्रांड और इंस्टॉलेशन की जांच कराएं लो-कॉस्ट लोकल किट अक्सर रिस्क लेकर आते हैं।
हर CNG सिलेंडर की एक वैधता होती है और यह समय-समय पर हाइड्रो-टेस्टिंग से गुजरना चाहिए। खरीदते समय सिलेंडर पर लिखी मैन्युफैक्चरिंग/एक्सपायरी डेट देखें और हाइड्रो-टेस्ट प्रमाणपत्र मांगें। एक्सपायर या बिना सर्टिफिकेट वाला सिलेंडर तुरंत बदलवाना सबसे सुरक्षित ऑप्शन है।
गैस लीकेज की जांच सबसे महत्वपूर्ण है। कार स्टार्ट करने पर, किट के आस-पास और इंजेक्शन पाइपलाइन के पास केमिकल/गैस की गंध हो तो इसे गंभीरता से लें। किसी एक्सपर्ट मैकेनिक से पाइप, वाल्व, कनेक्शन और रबर हॉज़ की पूरी जाँच करवा कर ही समझौता करें।
CNG ट्यूनिंग सही न हो तो इंजन को नुकसान पहुंचता है। टेस्ट-ड्राइव में पिक-अप, गियर-शिफ्ट और इंजन की आवाज़ सुनें। कागजात में लिखे माइलेज का मिलान रियल-वर्ल्ड माइलेज से करें। असमान्य ध्वनि या धुँआ दिखे तो खरीदें नहीं।
यदि कार में CNG किट लगी है, तो यह RC में दर्ज होनी चाहिए। RC में एंट्री न होने पर न सिर्फ कानूनी परेशानी होगी बल्कि इंश्योरेंस क्लेम भी मिलना मुश्किल हो सकता है। विक्रेता से यह अपडेटेड डॉक्युमेंट दिखवाना ज़रूरी है।
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सावधान खरीदारी और एक्सपर्ट इंस्पेक्शन आपके पैसे के साथ-साथ ज़िंदगी भी बचा सकते हैं। सेकंड-हैंड CNG कार खरीदें, पर हमेशा सुरक्षा-पहचान पहले रखें।






