भारत में शुरू होगा ड्राइवरलेस कारों का युग, टेरा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम ट्रायल को मिली मंजूरी
ड्राइवर के बिना चलने वाली कारें सड़कों पर उतरना सालों का सपना है। देसी और विदेशी ऑटो कंपनियों के लिए यह बड़ा मौका है, क्योंकि आने वाले दिनों में वे ड्राइवरलेस कारों का ट्रायल भारत में आसानी से शुरू कर पाएंगे।
- Written By: सिमरन सिंह
Driverless हो सकता है भारत। (सौ. Freepik)
भारत अब तकनीक की उस दिशा में बढ़ चला है, जहां ड्राइवर के बिना चलने वाली कारें सड़कों पर उतरेंगी। देसी और विदेशी ऑटो कंपनियों के लिए यह बड़ा मौका है, क्योंकि आने वाले दिनों में वे ड्राइवरलेस कारों का ट्रायल भारत में आसानी से कर सकेंगी। सूत्रों के अनुसार, सचिवों के समूह ने ट्राई द्वारा सुझाए गए टेरा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम को हरी झंडी दे दी है, जो ड्राइवरलेस तकनीक के परीक्षण की आधारशिला है।
क्या है टेरा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम?
टेरा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम की फ्रीक्वेंसी रेंज 95 GHz से लेकर 3 THz तक होती है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से रोबोटिक्स, ऑटोमोटिव रडार और आगामी 6G नेटवर्क के लिए किया जाता है। अब जब डिजिटल कम्युनिकेशन कमीशन (DCC) ने इसके उपयोग की मंजूरी दे दी है और TRAI ने इसके व्यावसायिक प्रयोग की सिफारिश की है, तो भारत में तकनीकी रिसर्च और ऑटोमोबाइल टेस्टिंग को नया आयाम मिलेगा।
दूरसंचार विभाग जल्द ही इस पर विस्तृत गाइडलाइंस जारी करेगा। इसके बाद कंपनियां प्रत्येक उपयोग पर ₹1000 शुल्क देकर इस स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल कर सकेंगी, वहीं रजिस्ट्रेशन फीस अलग से ली जाएगी। यह अनुमति पांच वर्षों के लिए दी जाएगी।
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कैसे चलती है ड्राइवरलेस कार?
ड्राइवरलेस या ऑटो ड्राइव कारें वो वाहन हैं जो बिना इंसानी ड्राइवर के खुद-ब-खुद चल सकती हैं। ये कारें सेंसर, कैमरा, रडार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपने आसपास के वातावरण को पहचानती हैं और निर्णय लेती हैं।
“टेस्ला” वह पहली बड़ी कंपनी थी, जिसने 2015 में लेवल 2 ऑटोपायलट तकनीक लॉन्च कर इस क्षेत्र में क्रांति ला दी थी।
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भारत में तकनीकी क्रांति की ओर कदम
टेरा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम की मंजूरी के साथ ही भारत ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी के नए युग में प्रवेश कर रहा है। इससे विदेशी निवेश, तकनीकी नवाचार और नई नौकरियों के अवसर भी बढ़ेंगे। ड्राइवरलेस कारें न केवल परिवहन को स्मार्ट बनाएंगी, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिहाज़ से भी बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
