भारत में कार निर्माताओं की आपत्ति: छोटे पेट्रोल कारों को मिलने वाली छूट पर उठे सवाल
Fuel Efficiency India: नए ईंधन दक्षता नियमों को लेकर ऑटोमोबाइल उद्योग में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां Tata Motors, Hyundai Motor India, Mahindra & Mahindra सरकार।
- Written By: सिमरन सिंह
Car को लेकर क्या है खबर। (सौ. AI)
EV Transition India: भारत में नए ईंधन दक्षता नियमों को लेकर ऑटोमोबाइल उद्योग में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां Tata Motors, Hyundai Motor India, Mahindra & Mahindra और JSW MG Motor सरकार द्वारा प्रस्तावित वजन-आधारित छूट का कड़ा विरोध कर रही हैं। कंपनियों का कहना है कि यह नीति प्रतिस्पर्धा को बिगाड़ देगी और भारत की इलेक्ट्रिक वाहन ट्रांजिशन को कमजोर कर देगी।
छोटी पेट्रोल कारों को मिलने वाली विशेष छूट पर विवाद
Reuters द्वारा देखी गई कंपनियों की चिट्ठियों के अनुसार, ऑटो कंपनियों ने सरकार से 909 किलोग्राम या उससे कम वजन वाली छोटी पेट्रोल कारों के लिए प्रस्तावित छूट को वापस लेने की मांग की है। इस प्रस्तावित नियम का सबसे बड़ा फायदा Maruti Suzuki को मिलने की संभावना है, क्योंकि उसकी घरेलू बिक्री का लगभग 16% हिस्सा सब-909 किग्रा कारों से आता है।
नए CAFE नियमों का उद्देश्य
भारत औसत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 113 ग्राम/किमी से घटाकर 91.7 ग्राम/किमी करने की तैयारी में है। नया लक्ष्य ऑटो कंपनियों को तेज़ी से EV बिक्री बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा। लेकिन सरकार ने अपने ड्राफ्ट में छोटी पेट्रोल कारों 4 मीटर से कम लंबाई, 1200cc से कम इंजन और 909 किग्रा तक वजन को “सीमित दक्षता सुधार क्षमता” के आधार पर राहत देने का प्रस्ताव रखा है। उद्योग के तीन शीर्ष अधिकारियों ने इस 909 किग्रा सीमा को “ग़ैर-वैज्ञानिक और वैश्विक मानकों से मेल न खाने वाला” बताया।
सम्बंधित ख़बरें
Honda ने मचा दिया तहलका, लॉन्च हुईं XR 300L और XR 300 Rally, दमदार इंजन के साथ ऑफ-रोडिंग का मजा होगा दोगुना
Mercedes-AMG E 53 Hybrid 4MATIC+ भारत में लॉन्च, 612hp की दमदार पावर और 100KM+ EV रेंज
Maruti Brezza Facelift ने लॉन्च से पहले मचाया धमाल, Bharat NCAP में मिली 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग
2026 में SUV मार्केट में आएगा बड़ा धमाका, Tata Safari EV से लेकर Kia Sorento तक, लॉन्च होंगी ये 4 दमदार SUVs
Tata, Hyundai, Mahindra की कड़ी आपत्ति
Mahindra & Mahindra ने ऊर्जा मंत्रालय को भेजे पत्र में कहा, “आकार या वजन के आधार पर विशेष श्रेणी बनाना, समान अवसरों को खत्म कर देगा और सुरक्षित व स्वच्छ वाहनों की दिशा में प्रगति को नुकसान पहुंचाएगा।” Hyundai ने इस छूट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब करने वाली नीति बताया। उसका कहना है कि “अचानक किए गए ऐसे बदलाव उद्योग की स्थिरता और ग्राहक हितों को प्रभावित कर सकते हैं।” JSW MG Motor ने कहा कि 909 किग्रा से कम वजन वाले 95% वाहन एक ही निर्माता से आते हैं, ऐसे में यह प्रस्ताव “असंतुलन पैदा करेगा।”
ये भी पढ़े: बाइक राइडिंग जैकेट्स फॉर मेन: सुरक्षा, स्टाइल और कम्फर्ट का परफेक्ट कॉम्बिनेशन
Maruti Suzuki ने दिया जवाब
Maruti Suzuki का कहना है कि छोटे, कम ईंधन खर्च वाले वाहनों की सुरक्षा कई देशों में निजी रूप से की जाती है, जिसमें यूरोप, अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और जापान शामिल हैं। कंपनी का तर्क है कि छोटे वाहन SUVs की तुलना में बहुत कम CO₂ उत्सर्जित करते हैं, इसलिए यह छूट राष्ट्रीय उत्सर्जन लक्ष्यों में मदद करेगी। हालांकि, यह भी सच है कि भारत में छोटे कारों की मांग लगातार गिर रही है और लोग SUVs की ओर अधिक झुक रहे हैं।
नियमों पर अंतिम फैसला अटका
नए CAFE नियमों पर सहमति न बनने के कारण नीति को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है। यह देरी EV और हाइब्रिड तकनीक में निवेश योजनाओं को प्रभावित कर सकती है। कई मंत्रालयों ने इस विषय पर Reuters के सवालों का जवाब नहीं दिया है। अब उद्योग की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इस प्रस्तावित छूट पर पुनर्विचार करेगी या इसे अंतिम नियम का हिस्सा बनाएगी।
