Car Market (Source. Freepik)
US Iran Tension And Price Hike: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर पर दिखने लगा है। वित्त वर्ष 2026 की आखिरी तिमाही में कंपनियां दबाव में हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे (EBITDA मार्जिन) में 80 से 100 बेसिस पॉइंट्स तक गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है। कार निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक, सिंथेटिक रबर और पेंट जैसे कच्चे माल महंगे हो गए हैं, जिससे गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग लागत तेजी से बढ़ रही है।
ऑटो इंडस्ट्री में उत्पादन के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा और गैस की जरूरत होती है। खासकर पेंट शॉप और फोर्जिंग यूनिट्स पूरी तरह गैस पर निर्भर होती हैं। तनाव के चलते पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कंपनियों को महंगे LNG का सहारा लेना पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे उत्पादन लागत में 15% से 25% तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा और गाड़ियों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
फिलहाल ऑटो कंपनियों के पास 3 से 5 हफ्तों का स्टॉक मौजूद है, जो शुरुआती झटके को संभाल सकता है। लेकिन अगर यह भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहा, तो प्रोडक्शन धीमा पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में नई गाड़ियों के लिए वेटिंग पीरियड बढ़ सकता है, जिससे ग्राहकों को डिलीवरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
इस पूरे संकट के बीच CNG गाड़ियों के लिए राहत की खबर सामने आई है। भारत सरकार ने परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इससे Maruti Suzuki और Bajaj Auto जैसी कंपनियों को फायदा मिल सकता है, जिनका CNG पोर्टफोलियो मजबूत है। पेट्रोल और डीजल के मुकाबले CNG की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संकट का असर सभी कंपनियों पर समान नहीं होगा। Maruti Suzuki, Ashok Leyland और Bajaj Auto जैसी कंपनियां ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। वहीं ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में संसेरा इंजीनियरिंग और CIE ऑटोमोटिव पर भी दबाव बढ़ सकता है।
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सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, बल्कि गाड़ियों के निर्यात पर भी इसका असर पड़ सकता है। अगर तनाव ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ तक पहुंचता है, तो समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा। इससे शिपिंग लागत और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ जाएंगे। खासकर Ashok Leyland जैसी कंपनियों को, जिनका मिडिल-ईस्ट में बड़ा बाजार है, निर्यात में देरी और लागत बढ़ने का सामना करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, इस वैश्विक तनाव का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। आने वाले समय में गाड़ियां महंगी हो सकती हैं और डिलीवरी में देरी भी बढ़ सकती है। मिडिल क्लास के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो समय रहते फैसला लेना समझदारी हो सकती है।