Highlights:
मिडटर्म चुनाव में हार के बाद डेमोक्रेट्स को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत मिला।
ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में दो बार महाभियोग का सामना कर चुके हैं।
डेमोक्रेट्स महाभियोग चला सकते हैं, लेकिन राष्ट्रपति को हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है।
Midterm Elections United States: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मिडटर्म चुनाव के नतीजे बड़ा राजनीतिक झटका लेकर आए हैं। रिपब्लिकन पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना नियंत्रण खो दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल कर लिया है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने आने वाले दो साल में कई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
चुनाव से पहले ट्रंप ने खुद रिपब्लिकन सांसदों को चेतावनी दी थी कि अगर पार्टी मिडटर्म चुनाव हारती है, तो डेमोक्रेट्स उन्हें महाभियोग के जरिए राष्ट्रपति पद से हटाने की कोशिश करेंगे।
6 जनवरी 2026 को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के रिपब्लिकन सांसदों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा था, "आपको मिडटर्म चुनाव जीतने ही होंगे। अगर हम चुनाव नहीं जीतते हैं, तो वे मुझे महाभियोग के जरिए पद से हटाने का कोई न कोई बहाना ढूंढ लेंगे।"
अब चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या डेमोक्रेट्स तीसरी बार ट्रंप के खिलाफ महाभियोग ला सकते हैं? क्या इस बार उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति पद से हटाया जा सकता है?
अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं- सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स। राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के पास है।
चुनाव से पहले इस सदन में रिपब्लिकन पार्टी को 218-214 सीटों के मामूली अंतर से बहुमत हासिल था। लेकिन मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने 218 सीटों का जरूरी आंकड़ा पार कर लिया। इससे उन्हें सदन में बहुमत मिल गया है।
इस बहुमत के साथ डेमोक्रेट्स ट्रंप और उनके प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू कर सकते हैं। हालांकि, केवल महाभियोग प्रस्ताव पारित होने से राष्ट्रपति को पद से नहीं हटाया जा सकता।
इसके लिए सीनेट में भी सुनवाई होती है। राष्ट्रपति को दोषी ठहराने और पद से हटाने के लिए सीनेट में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है। यानी केवल साधारण बहुमत से यह संभव नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान दो बार महाभियोग का सामना कर चुके हैं। हालांकि, दोनों ही बार सीनेट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया था।
पहली बार दिसंबर 2019 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने उनके खिलाफ दो आरोपों को मंजूरी दी थी। इनमें सत्ता के दुरुपयोग और कांग्रेस की जांच में बाधा डालने के आरोप शामिल थे। मामला यूक्रेन के अधिकारियों पर ट्रंप की ओर से अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की जांच कराने के कथित दबाव से जुड़ा था।
फरवरी 2020 में सीनेट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया। उस समय रिपब्लिकन सीनेटर मिट रोमनी अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर ट्रंप को दोषी ठहराने के पक्ष में मतदान करने वाले इकलौते रिपब्लिकन सांसद थे।
दूसरी बार जनवरी 2021 में ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाया गया। उन पर 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी कैपिटल में हुई हिंसा के संबंध में विद्रोह के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था।
इस बार 10 रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर महाभियोग के समर्थन में वोट दिया। हालांकि, सीनेट में 57 सदस्यों ने उन्हें दोषी ठहराने के पक्ष में मतदान किया, जबकि 43 ने विरोध किया। यह जरूरी दो-तिहाई बहुमत से कम था।
डेमोक्रेट्स के पास अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में महाभियोग प्रस्ताव पारित कराने के लिए पर्याप्त सीटें हैं। लेकिन सीनेट में दो-तिहाई बहुमत जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, सीनेट की सभी सीटों के नतीजे डेमोक्रेट्स के पक्ष में चले जाने की स्थिति में भी उन्हें राष्ट्रपति को दोषी ठहराने के लिए जरूरी 67 वोट नहीं मिलेंगे।
यानी महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करना और राष्ट्रपति को पद से हटाना दो अलग-अलग बातें हैं।
हाउस में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता महंगाई और आम लोगों के जीवनयापन की लागत कम करना होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी कार्यपालिका की जवाबदेही तय करने और उसकी निगरानी करने पर ध्यान देगी।
वहीं, हाउस ओवरसाइट कमिटी में डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष सदस्य रॉबर्ट गार्सिया ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांच शुरू करने का संकेत दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'अपने वकीलों को तैयार रखिए।'
बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स के पास समन जारी करने और कांग्रेस की जांच में सहयोग नहीं करने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की शक्तियां भी होंगी।