

Highlights:
भारत, नेपाल और बांग्लादेश के पुरुषों की औसत लंबाई के आंकड़ों में कितना अंतर?
चीन और पाकिस्तान के साथ भारत की औसत लंबाई की तुलना में क्या सामने आया?
बचपन में कुपोषण और पोषण की कमी का लोगों की लंबाई पर कितना असर पड़ता है?
Which Country People Highest Height in World: दुनिया में अलग-अलग देशों के लोगों की औसत लंबाई में काफी अंतर देखने को मिलता है। कहीं 19 साल के युवाओं की औसत लंबाई 6 फीट के करीब है, तो कहीं यह महज 5 फीट के आसपास है। दुनिया में सबसे लंबे पुरुष नीदरलैंड के हैं, जबकि सबसे कम औसत लंबाई वाले पुरुष पूर्वी तिमोर में पाए जाते हैं। दोनों देशों के बीच औसत लंबाई का अंतर करीब 23.7 सेंटीमीटर यानी लगभग एक फुट है।
यह आंकड़े साल 2020 में मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन पर आधारित हैं। एनसीडी रिस्क फैक्टर कोलैबोरेशन ने 1985 से 2019 के बीच 200 देशों और क्षेत्रों के 6.5 करोड़ लोगों से जुड़े 2,181 अध्ययनों का विश्लेषण किया था। इसमें 19 साल के युवाओं की औसत लंबाई को आधार बनाया गया है, क्योंकि इस उम्र तक ज्यादातर लोगों की शारीरिक लंबाई लगभग पूरी हो जाती है।
अध्ययन के मुताबिक, नीदरलैंड के पुरुषों की औसत लंबाई 183.8 सेंटीमीटर है। वहीं, पूर्वी तिमोर में यह आंकड़ा 160.1 सेंटीमीटर है। महिलाओं की बात करें तो नीदरलैंड 170.4 सेंटीमीटर की औसत लंबाई के साथ पहले स्थान पर है। दूसरी ओर ग्वाटेमाला की महिलाओं की औसत लंबाई महज 150.9 सेंटीमीटर है।
दुनियाभर में पुरुषों की औसत लंबाई 173.1 सेंटीमीटर और मध्यिका 173.5 सेंटीमीटर है। यूरोप के उत्तरी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों के देश लंबाई के मामले में शीर्ष पर हैं, जबकि दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य अमेरिका के कई देश निचले पायदान पर हैं।
नीदरलैंड के लोग हमेशा से दुनिया में सबसे लंबे नहीं थे। करीब 150 साल में उनकी औसत लंबाई में बड़ा बदलाव आया। इसके पीछे बेहतर खानपान, स्वास्थ्य सुविधाएं और प्राकृतिक चयन को अहम कारण माना जाता है।
नीदरलैंड में दूध, पनीर और दही जैसे डेयरी उत्पादों का खूब इस्तेमाल होता है। इनमें मौजूद कैल्शियम और प्रोटीन हड्डियों के विकास में मदद करते हैं। इसके अलावा बच्चों और गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पोषण मिलने से भी शारीरिक विकास को बढ़ावा मिला।
डेटापांडास साइट (Datapandas) के अनुसार, कम औसत लंबाई वाले देशों में बचपन का कुपोषण एक बड़ी वजह है। पूर्वी तिमोर, लाओस और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों में बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। ग्वाटेमाला में पांच साल से कम उम्र के करीब आधे बच्चे लंबे समय तक कुपोषण से प्रभावित हैं। ग्रामीण माया समुदायों में यह आंकड़ा 70 से 80 फीसदी तक पहुंच जाता है।
भारत में 19 साल के पुरुषों की औसत लंबाई 166.5 सेंटीमीटर है, जो वैश्विक औसत से कम है। बांग्लादेश में यह 165.1 और नेपाल में 164.4 सेंटीमीटर है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्भधारण से लेकर बच्चे के दो साल का होने तक पर्याप्त पोषण मिलना लंबाई के विकास के लिए बेहद जरूरी है।
दक्षिण कोरिया इसका उदाहरण है कि लंबाई केवल आनुवंशिक कारणों से तय नहीं होती। 1914 से 2014 के बीच वहां महिलाओं की औसत लंबाई करीब 20.2 सेंटीमीटर बढ़ी। बेहतर खानपान, साफ पानी, स्वच्छता और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं ने इसमें अहम भूमिका निभाई।
अध्ययन में दक्षिण कोरिया के पुरुषों की औसत लंबाई 175.5 सेंटीमीटर दर्ज की गई है। वहीं, चीन में यह 175.7 सेंटीमीटर और जापान में 172.1 सेंटीमीटर है। इससे स्पष्ट होता है कि किसी देश के बच्चों को मिलने वाला पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं आने वाली पीढ़ियों की औसत लंबाई पर गहरा असर डालती हैं।
अध्ययन के मुताबिक, भारत में 19 साल के पुरुषों की औसत लंबाई 166.5 सेंटीमीटर है। वहीं, बांग्लादेश में यह 165.1 सेंटीमीटर और नेपाल में 164.4 सेंटीमीटर दर्ज की गई। यानी इन तीनों दक्षिण एशियाई देशों में औसत लंबाई वैश्विक औसत 173.1 सेंटीमीटर से कम है।
इसके मुकाबले चीन में पुरुषों की औसत लंबाई 175.7 सेंटीमीटर और दक्षिण कोरिया में 175.5 सेंटीमीटर है। जापान में यह आंकड़ा 172.1 सेंटीमीटर है। इस तरह भारत और चीन के बीच औसत लंबाई का अंतर 9.2 सेंटीमीटर है। पाकिस्तान की औसत लंबाई 167.3 है। पाकिस्तान के लोग भी भारत से लंबे हैं।