मिलान में विंटर ओलंपिक से पहले प्रदर्शन (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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मिलान में विंटर ओलंपिक से पहले हिंसक प्रदर्शन, अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती का कड़ा विरोध

Winter Olympics Protest: मिलान में शीतकालीन ओलंपिक से पहले हजारों लोगों ने हिंसक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी ICE की तैनाती, पेड़ों की कटाई और बढ़ती महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे और पुलिस से भिड़ गए।

प्रिया सिंह

Protests Against US ICE Agents In Italy: इटली के शहर मिलान में शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन से पहले व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया है। हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं और इटली में अमेरिकी ICE एजेंटों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का मुद्दा गरमाया हुआ है। स्थानीय लोग पर्यावरण के नुकसान और शहर में बढ़ती महंगाई को लेकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं जिससे वहां तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।

अमेरिकी एजेंसियों का विरोध

इटली के नागरिकों में अमेरिकी आव्रजन प्रवर्तन एजेंसी यानी ICE के एजेंटों की मौजूदगी को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ओलंपिक के बहाने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा के लिए इन एजेंटों की तैनाती पूरी तरह गलत है। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल के पास सुरक्षा बढ़ा दी है और दंगारोधी हेलमेट पहनकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है।

पर्यावरण पर गंभीर संकट

विंटर ओलंपिक के आलोचकों का कहना है कि कृत्रिम बर्फ का उपयोग पहाड़ों के नाजुक पर्यावरण और जल संसाधनों के लिए बहुत बड़ा खतरा है। 29 वर्षीय प्रदर्शनकारी फ्रांसेस्का मिसाना ने कहा कि ये खेल अब सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से बिल्कुल भी टिकाऊ नहीं रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कृत्रिम बर्फ के व्यापक ऊर्जा उपयोग और वनों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ वहां कड़े नारे लगाए हैं।

मिलान में आवास संकट

प्रदर्शनकारियों के अनुसार मिलान अब आम निवासियों के लिए रहने लायक नहीं रहा है क्योंकि धनी लोगों के आने से महंगाई बहुत बढ़ गई है। स्थानीय लोग अपनी वित्तीय और फैशन राजधानी में आवास संकट का सामना कर रहे हैं जबकि पर्यटकों के लिए पूरा शहर बदल रहा है। आयोजकों का दावा है कि इन खेलों को टिकाऊ बताकर प्रचारित किया गया था लेकिन असल में यह केवल जनता की बर्बादी है।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प

शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने राजमार्ग पर जाने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और पानी की बौछारें छोड़ीं। प्रदर्शनकारियों ने भी जवाब में पटाखे और स्मोक बम फेंके जिससे स्थिति काफी हिंसक हो गई और बच्चे वाले परिवार वहां से भागने लगे। इससे पहले ट्यूरिन में हुए प्रदर्शन में भी 100 से अधिक पुलिस अधिकारी घायल हुए थे जिससे बल पहले से सतर्क है।

बुनियादी ढांचे पर अरबों का खर्च

अल्बर्टो डि मोंटे ने कहा कि ओलंपिक के नाम पर पहाड़ों की रक्षा करने के बजाय नई सड़कें बनाने पर अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि मिलान को पर्यटकों के लिए एक 'डिज्नीलैंड' में बदल दिया गया है जबकि यहां के मूल निवासियों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। पर्यावरण प्रेमियों ने मिलान-कोर्टिना बॉबस्ले ट्रैक के लिए सैकड़ों पेड़ों को काटने के फैसले की भी वहां कड़ी निंदा की है।

प्रदर्शनकारियों की अनूठी मांगें

69 वर्षीय जियोवानी गैनी जैसे कई बुजुर्गों ने भी गत्ते के बने पेड़ों के साथ प्रदर्शन किया ताकि काटे गए वनों का दर्द दिखाया जा सके। प्रदर्शनकारियों के बैनर पर "शहर को वापस लो और पहाड़ों को आजाद करो" जैसे नारे लिखे थे जो उनकी गहरी नाराजगी दर्शाते हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें कम बर्फ और ज्यादा ग्लेशियर चाहिए ताकि प्राकृतिक संतुलन बना रहे और आने वाला भविष्य सुरक्षित हो।

ओलंपिक विलेज की सुरक्षा

नकाबपोश प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने ओलंपिक विलेज से कुछ ही दूरी पर स्मोक बम और पटाखे फोड़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इस विलेज में लगभग 1500 एथलीट ठहरे हुए हैं जिनकी सुरक्षा को लेकर अब इतालवी सरकार और प्रशासन काफी चिंतित नजर आ रहा है। शांतिपूर्ण मार्च के अंत में हुई इस अचानक हिंसा ने पूरे आयोजन की गरिमा पर एक काला साया डाल दिया है।

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