USS Abraham Lincoln Suicide: अमेरिकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बेहद सनसनीखेज दावे किए जा रहे हैं। इन वायरल रिपोर्टों में सैनिकों की मानसिक स्थिति बिगड़ने और नाविकों द्वारा समुद्र में कूदकर जान देने की बातें कही जा रही हैं।
इस बीच करीब सात अमेरिकी सैनिकों की मौत होने और आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी का दावा भी किया गया था। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और रक्षा अधिकारियों ने इन दावों को गलत बताते हुए स्पष्ट किया है कि जहाज पर किसी भी सैनिक की मौत नहीं हुई है।
सेंटकॉम ने इस विवाद का सच बताते हुए कहा कि गत तीन अगस्त को एक नाविक दुर्घटनावश समुद्र में गिर गया था। लेकिन बचाव दल ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे तुरंत सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। इसके बाद नाविक को प्राथमिक उपचार देकर आगे की देखभाल के लिए बाहर भेजा गया।
अधिकारियों के अनुसार, एक नाविक के समुद्र में गिरने की इसी सामान्य घटना को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया। इसे जानबूझकर सात सैनिकों की मौत और आत्महत्याओं से जोड़ा गया। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी इन रिपोर्टों को पूरी तरह से मनगढ़ंत और गुमराह करने वाला बताया है।
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह इस एयरक्राफ्ट कैरियर की समुद्र में अत्यधिक लंबी तैनाती को माना जा रहा है। यूएसएस अब्राहम लिंकन नवंबर 2025 से तैनात है और उसने अब तक 260 दिनों से अधिक का समय समुद्र में बिताया है। इस युद्धपोत पर वर्तमान में लगभग 5,000 नौसैनिक मौजूद हैं।
इतने लंबे समय तक समुद्र में रहने से परिवारों और सांसदों ने कड़ा विरोध जताकर चिंताएं उठाई हैं। उन्होंने सुविधाओं की कमी, खराब आपूर्ति और सैनिकों की मानसिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए। हालांकि नौसेना ने आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी के दावों को खारिज किया है।
सैनिकों के मानसिक तनाव और लगातार बढ़ती चिंताओं को देखते हुए अमेरिकी नौसेना ने अब एक बड़ा फैसला लिया है। अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से तैनात इस क्रू को राहत देने के लिए जल्द ही नया युद्धपोत भेजा जाएगा। अब यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन को तैनात करने की तैयारी की गई है।
इस बड़े निर्णय से लंबे समय से तैनात सैनिकों को वापस लौटने और अपने परिवारों के साथ समय बिताने का मौका मिल सकेगा। हालांकि इस तैनाती ने अमेरिकी नौसेना के सामने सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रबंधन से जुड़ी कुछ बेहद गंभीर और कूटनीतिक चुनौतियां जरूर खड़ी कर दी हैं।