पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

हमें टॉयलेट पेपर की तरह किया इस्तेमाल...पाकिस्तान का अमेरिका से मोह भंग! अफगान युद्ध पर ख्वाजा आसिफ का खुलासा

US-Pakistan News: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में कहा कि 2001 के बाद अमेरिका से जुड़ना बड़ी गलती थी, जिससे देश को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान हुआ।

अक्षय साहू

Khawaja Asif Pakistan Toilet Paper Statement: अमेरिका के साथ करीबी रिश्तों की पैरवी करने वाला पाकिस्तान अब अपने पिछले फैसलों पर खुलकर पछतावा करता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में दिए गए अपने हालिया बयान में अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि 2001 के बाद अमेरिका से दोबारा नजदीकी बढ़ाने का निर्णय देश के लिए बड़ी रणनीतिक भूल साबित हुआ। उनके मुताबिक, इस फैसले की कीमत पाकिस्तान आज तक राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से चुका रहा है।

संसद में बोलते हुए ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया कि अफगानिस्तान में अमेरिका का समर्थन करना धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक ताकतों से समर्थन और राजनीतिक वैधता हासिल करने के उद्देश्य से था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान इन युद्धों में इस्लाम की रक्षा या जिहाद के नाम पर शामिल नहीं हुआ था, बल्कि एक सुपरपावर का साथ पाने के लिए उसने यह रास्ता चुना। उनके अनुसार, अफगानिस्तान का युद्ध वास्तव में बड़ी शक्तियों के बीच प्रॉक्सी संघर्ष था, जिसे जिहाद का नाम देकर प्रस्तुत किया गया।

अमेरिका का साथ देने का अफसोस

ख्वाजा आसिफ ने यह भी माना कि उस दौर में युद्ध को सही ठहराने के लिए देश की शिक्षा प्रणाली में बदलाव किए गए। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में ऐसे तत्व जोड़े गए, जिनका असर आज भी समाज में देखा जा सकता है। उनका कहना था कि सोवियत संघ की वापसी के बाद पाकिस्तान को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद पाकिस्तान फिर से अमेरिका के साथ खड़ा हो गया और लंबे समय तक उसकी रणनीति का हिस्सा बना रहा।

टॉयलेट पेपर की तरह किया इस्तेमाल

आसिफ ने कहा कि लगभग दो दशकों तक पाकिस्तान ने खुद को अमेरिकी समर्थन पाने के लिए समर्पित रखा। उनका आरोप था कि अमेरिका ने पाकिस्तान का उपयोग अपने हितों के लिए किया और बाद में उसे महत्वहीन समझकर किनारे कर दिया। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ “टॉयलेट पेपर से भी बुरा व्यवहार” किया गया पहले इस्तेमाल किया और फिर फेंक दिया गया।

रक्षा मंत्री ने देश में बढ़ती हिंसा, कट्टरता और आर्थिक संकट के लिए भी उस दौर की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उनके अनुसार, इन फैसलों से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में पाकिस्तान को अपनी विदेश नीति अधिक संतुलित और आत्मनिर्भर दृष्टिकोण के साथ तय करनी चाहिए, ताकि वह किसी बाहरी शक्ति पर अत्यधिक निर्भर न हो। 

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