शिव नटराज मूर्ति, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

US से भारत आएंगी 3 प्राचीन मूर्तियां, तमिलनाडु के मंदिरों से हुई थी चोरी; अमेरिका ने किया बड़ा ऐलान

US Returns India Idols: US का स्मिथसोनियन म्यूजियम तमिलनाडु के मंदिरों से चोरी हुई चोल और विजयनगर काल की तीन दुर्लभ मूर्तियां भारत को लौटाएगा। इसमें शिव नटराज की 1000 साल पुरानी मूर्ति भी शामिल है।

अमन उपाध्याय

US museum Return Bronze Sculptures To India: अमेरिका के स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के 'नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट' ने भारत की सांस्कृतिक विरासत की बहाली की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। म्यूजियम ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह तमिलनाडु के मंदिरों से चुराई गई तीन दुर्लभ और प्राचीन कांस्य मूर्तियां भारत सरकार को वापस करेगा।

यह निर्णय एक गहन जांच और विस्तृत प्रोवेनेंस रिसर्च के बाद लिया गया है जिसमें यह निर्विवाद रूप से साबित हुआ कि इन कलाकृतियों को अवैध तरीके से देश से बाहर ले जाया गया था।

कला की ये तीन उत्कृष्ट कृतियां क्या हैं?

लौटाई जाने वाली ये तीनों मूर्तियां दक्षिण भारतीय कांस्य कला की उत्कृष्ट मिसालें मानी जाती हैं जिनका उपयोग पारंपरिक रूप से मंदिरों में पूजा और शोभायात्राओं के लिए किया जाता था।

शिव नटराज (चोल काल): लगभग 990 ईस्वी की यह मूर्ति शिव के ब्रह्मांडीय नृत्य का प्रतीक है। यह तंजावुर जिले के श्री भावा औषधेश्वर मंदिर से जुड़ी है जहां इसे आखिरी बार 1957 में फोटोग्राफ किया गया था।

सोमस्कंद (चोल काल): 12वीं शताब्दी की इस मूर्ति में भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय को एक साथ दर्शाया गया है। इसे मन्नारकुडी के विश्नाथ मंदिर से चुराया गया था।

संत सुंदरार विद परवई (विजयनगर काल): 16वीं शताब्दी की यह मूर्ति नयनार संत सुंदरार और उनकी पत्नी परवई की है  जिसे कल्लाकुरिची के एक शिव मंदिर से लिया गया था।

चोरी और तस्करी का काला इतिहास

म्यूजियम की जांच में यह खुलासा हुआ कि इन मूर्तियों को 1950 के दशक में तमिलनाडु के मंदिरों से चुराया गया था और अवैध तरीके से विदेश भेजा गया था। इस जांच में फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पॉन्डिचेरी के फोटो आर्काइव्स और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। रिपोर्ट के अनुसार, शिव नटराज की मूर्ति को 2002 में न्यूयॉर्क की एक गैलरी से फर्जी दस्तावेजों के जरिए खरीदा गया था।

वापसी का अनूठा समझौता

भारत सरकार और म्यूजियम के बीच एक विशेष समझौता हुआ है। इसके तहत 'शिव नटराज' की मूर्ति को दीर्घकालिक ऋण पर म्यूजियम में ही प्रदर्शित किया जाएगा ताकि दुनिया को इसकी चोरी, खोज और वापसी की पूरी कहानी बताई जा सके। वहीं, बाकी दो मूर्तियां सोमस्कंद और संत सुंदरार भारतीय दूतावास के माध्यम से जल्द ही भारत भेजी जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर लूटी गई संपदा को वापस लाने की दिशा में यह एक बेहद सकारात्मक और नैतिक कदम है।

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