US Missile Strike On Kharg Island Iran Oil Tanker: फारस की खाड़ी में ईरान के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल खार्ग आइलैंड के पास शनिवार को कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने एक बड़े ईरानी तेल टैंकर को प्रोजेक्टाइल और मिसाइलों से निशाना बनाया। हालांकि, इस हमले की अभी तक अमेरिका या ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना ने पहले से तनावपूर्ण खाड़ी क्षेत्र में चिंता और बढ़ा दी है।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के संवाददाता ने खार्ग आइलैंड के पास समुद्र की दिशा से कई तेज धमाकों की आवाजें सुनीं। हालांकि, धमाकों के बाद आसमान में आग या धुएं का कोई बड़ा गुबार दिखाई नहीं दिया। ऐसे में तत्काल यह स्पष्ट नहीं हो सका कि टैंकर को कितना नुकसान हुआ है।
सरकारी मीडिया नूरन्यूज और समाचार वेबसाइट असर ईरान ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से दावा किया कि अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत ने तेल टैंकर को निशाना बनाया। रिपोर्ट के मुताबिक, टैंकर खार्ग टर्मिनल पर माल उतार रहा था, तभी उस पर चार अमेरिकी प्रोजेक्टाइल और मिसाइलें दागी गईं।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब होर्मुज स्ट्रेट और फारस की खाड़ी में अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान की ओर से इस समुद्री मार्ग पर यातायात रोकने की कोशिशों और अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी के कारण क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक कच्चे तेल और LNG की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से गुजरती है। इसलिए यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
इससे पहले 30 अगस्त को अमेरिका ने ईरान के लारक आइलैंड पर हवाई हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
इसके बाद 1 सितंबर को अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में दोबारा भारी बमबारी की। अमेरिका ने दावा किया कि इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन, संचार केंद्र और समुद्री माइन बिछाने वाले सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 31 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक AI वीडियो शेयर कर खार्ग आइलैंड को पूरी तरह तबाह करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकाने 'पिकैक्स माउंटेन' को भी निशाना बनाने की धमकी दी।
इस बीच, ट्रंप ने संघर्ष को मामूली बताते हुए अमेरिकी युद्ध खर्च को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज किया। उनके अनुसार अमेरिकी करदाताओं के करीब 37.5 अरब डॉलर इस युद्ध पर खर्च हो चुके हैं और 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है। उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने भी संसदीय चुनाव से पहले इसे पूर्ण युद्ध मानने से इनकार किया है।
खार्ग आइलैंड के पास हुई यह घटना अगर आधिकारिक तौर पर सैन्य हमले के रूप में पुष्टि होती है, तो इससे अमेरिका-ईरान तनाव और गहरा सकता है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।