नागपुर से 770 करोड़ का गोला बारूद खरीदना पड़ा भारी, ईस्टोनिया के रक्षा मंत्री हन्नो पेवकुर ने दिया इस्तीफा

Estonia Defence Minister Resign: नागपुर के जयसवाल नीको ग्रुप से जुड़े 770 करोड़ रुपये के गोला-बारूद सौदे के विवाद के बाद ईस्टोनिया के रक्षा मंत्री हन्नो पेवकुर ने इस्तीफा दे दिया है।
Estonia Defence Minister Hanno Pevkur Resign
एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हनो पेवकुर ने दिया इस्तीफासोर्स: सोशल मीडिया
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Nagpur-Estonia Defence Deal Controversy: यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच यूरोप से एक बहुत बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है, जिसका सीधा तार महाराष्ट्र के नागपुर शहर से जुड़ गया है। यूक्रेन को 155 एमएम आर्टिलरी (तोपखाने) के गोला-बारूद की आपूर्ति के लिए किए गए 70 मिलियन यूरो (लगभग 770 करोड़ रुपए) के डिफेंस सौदे में मचे भारी बवाल के बाद ईस्टोनिया के रक्षा मंत्री हन्नो पेवकुर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

हन्नो पेवकुर ने दिया रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा

देश के नेशनल ऑडिट ऑफिस द्वारा रक्षा खरीद प्रक्रिया पर जारी एक तीखी रिपोर्ट और आपराधिक जांच शुरू होने के बाद, हन्नो पेवकुर ने इस पूरे मामले की राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की आधिकारिक घोषणा की। पेवकुर जुलाई 2022 से ईस्टोनिया के रक्षा मंत्री के रूप में सेवाएं दे रहे थे और देश के सबसे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों में से एक थे।

हन्नो पेवकु ने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा कि ईस्टोनियाई सुरक्षा किसी एक व्यक्ति का प्रोजेक्ट नहीं है। यह हमारी साझी जिम्मेदारी है। इसीलिए मुझे आज पूरे रक्षा क्षेत्र की राजनीतिक जिम्मेदारी लेनी होगी।

ईस्टोनिया रक्षा सौदे का क्या है नागपुर कनेक्शन?

यह विवाद वर्ष 2024 में 'ईस्टोनियन सेंटर फॉर डिफेंस इन्वेस्टमेंट्स' (ECDI) द्वारा दिए गए ठेके से जुड़ा है। यह ठेका इटली में पंजीकृत कंपनी 'डाटासेल एसआरएल' को मिला था, जिसे मार्च 2024 में नागपुर स्थित जयसवाल नीको ग्रुप की सहायक कंपनी नीको डिफेंस म्यूनिशंस ने अधिग्रहित किया था।

यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान यूक्रेन को गोला-बारूद की तत्काल आवश्यकता को पूरा करने के लिए यूरोपीय संघ के यूरोपीय शांति कोष के तहत यह 770 करोड़ की राशि अग्रिम दी गई थी। हालांकि बाद में इस सौदे पर कई सवाल उठे।

नई फंडिंग व्यवस्था के कारण विवाद

जयसवाल नीको और डाटासेल ने ईस्टोनियाई सरकार के सभी आरोपों का खंडन किया है। कंपनियों का कहना है कि यह विवाद गुणवत्ता की विफलता के कारण नहीं, बल्कि यूरोपीय नियमों और फंडिंग व्यवस्था में आए बदलावों की वजह से खड़ा हुआ है।

  • अदालत में दांव-पेचः डाटासेल ने ईस्टोनियाई सरकार के खिलाफ काउंटर-क्लेम (प्रतिदावा) दायर कर अनुबंध को असामयिक रूप से रद्द करने के एवज में करोड़ों यूरो के मुआवजे की मांग की है।

  • कंपनी का पक्ष: कंपनी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें 59 मिलियन यूरो का एडवांस मिला था, जिसके बदले वे 58 मिलियन यूरो मूल्य के सामान की डिलीवरी और बिलिंग कर चुके थे। कंपनी के अनुसार ईस्टोनियाई अधिकारियों ने सामान का निरीक्षण भी किया था। कंपनी का आरोप है कि ईस्टोनिया सरकार ने 'ईयू फंड लैप्स हो जाने का हवाला देते हुए सौदे को रद्द कर दिया, जिससे तैयार गोला-बारूद का बड़ा स्टॉक बेकार पड़ा रह गया।

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डाटासेल ने ठेका रद्द करने के फैसले को बताया गलत

डाटासेल एस. आर. एल. ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने ईसीडीआई द्वारा लगाए गए देरी और गुणवत्ता संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ठेके रद्द करने का फैसला पूरी तरह से अनुचित और अतार्किक है।

सबसे उन्नत डिजिटल देश है ईस्टोनिया

ईस्टोनिया बाल्टिक देश है, जो बाल्टिक सागर की एक शाखा फिनलैंड की खाड़ी के दक्षिणी तट पर स्थित है। इस पूर्वी यूरोपीय देश की सीमाएं लातविया और रूस से लगती है, जबकि समुद्री सीमाएं फिनलैंड और स्वीडन से जुड़ी है। इसका कुल क्षेत्रफल 45,227 वर्ग किलोमीटर है। यह एक विकसित, शांत और दुनिया का सबसे उन्नत डिजिटल देश है।

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