अमेरिका ने चाबहार पोर्ट के पास बमबारी की (सोर्स- सोशल मीडिया ) 
विदेश

अमेरिका ने चाबहार पोर्ट के पास बरसाए बम, ईरानी सैन्य ठिकाने को बनाया निशाना, भारत की बढ़ेगी परेशानी

US Bombing Chabahar Port: ईरान के चाबहार क्षेत्र के पास अमेरिकी हमले की खबरों के बीच यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम बना हुआ है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापार मार्ग देता है।

अक्षय साहू

US Strikes Chabahar Port: अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के दक्षिण-पूर्वी इलाके में स्थित चाबहार फ्री ट्रेड एरिया के पास एक पहाड़ पर बने सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। वॉयस ऑफ अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के बाद आसपास के क्षेत्रों में तेज और लगातार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। यह इलाका ईरान की पाकिस्तान के साथ लगने वाली दक्षिण-पूर्वी सीमा के पास स्थित है और रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

भारत के लिए चाबहार पोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है। ‘चाबहार’ शब्द का अर्थ ‘चार झरने’ होता है। यह पोर्ट भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया और आगे यूरोप तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करने की क्षमता रखता है। दरअसल, पाकिस्तान के रास्ते पर निर्भर हुए बिना इन क्षेत्रों तक पहुंच बनाने के लिए यह भारत के लिए एक वैकल्पिक और रणनीतिक मार्ग प्रदान करता है।

चाबहार के विकास में 370 मिलियन डॉलर निवेश

साल 2024 में भारत और ईरान के बीच इस परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इस 10 वर्षीय अनुबंध के तहत भारत की सरकारी कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) ने चाबहार पोर्ट के विकास में लगभग 370 मिलियन डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी। यह निवेश इस बात का संकेत है कि भारत इस पोर्ट को अपनी दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक योजनाओं का अहम हिस्सा मानता है। भारत ने आने वाले वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है। सरकार का उद्देश्य 2030 तक अर्थव्यवस्था को 10 ट्रिलियन डॉलर और 2034 तक 15 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को सुरक्षित और स्थिर व्यापार मार्गों की जरूरत होगी। इसी कारण चाबहार पोर्ट को भारत की भू-राजनीतिक और आर्थिक रणनीति में बेहद अहम माना जाता है।

अमेरिकी दवाब में भारत ने छोड़ा चाबहार

हालांकि, भारत ने इस परियोजना को पूरी तरह से छोड़ा नहीं है, लेकिन फिलहाल इसकी गति कुछ धीमी कर दी गई है। इसका प्रमुख कारण ईरान पर लगाए गए अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध हैं। अगर भारत इस परियोजना में बड़े पैमाने पर निवेश करता, तो उस पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा पैदा हो सकता था। इसके अलावा क्षेत्र में बढ़ते राजनीतिक तनाव और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों ने भी निवेश को जटिल बना दिया है।

फिर भी, चाबहार पोर्ट भारत के लिए सिर्फ एक व्यापारिक परियोजना नहीं है। यह भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण मार्ग प्रदान करता है। यही कारण है कि बदलती परिस्थितियों के बावजूद भारत इस परियोजना को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानता है। 

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