अमेरिका ईरान तनाव, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान के आगे 'बैकफुट' पर अमेरिका! डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की शर्तें घटाईं; अंकारा में होगी शांति वार्ता

Trump Reduced Terms Iran: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के प्रति नरमी दिखाई है। अंकारा बैठक से पहले ट्रंप ने परमाणु हथियार और फांसी पर रोक जैसी केवल दो मुख्य शर्तें रखी हैं।

अमन उपाध्याय

US Iran Ankara Talks:  ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता की उम्मीद जगी है। स्रोतों के अनुसार, इस हफ्ते तुर्की के अंकारा में दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण शांति समझौते को लेकर बैठक आयोजित की जा सकती है। इस बैठक की पहल मुख्य रूप से मिस्र, कतर और तुर्की ने की है। इसी कूटनीतिक पहल के तहत अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ ईरान के उच्चाधिकारियों की मुलाकात होने की संभावना है।

अमेरिका ने क्यों कम कीं अपनी शर्तें?

इस बैठक से पहले एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला है कि अमेरिका ने अपनी शर्तों में कटौती की है। पहले अमेरिका ने बातचीत के लिए चार प्रमुख शर्तें रखी थीं जिनमें-

  • ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा
  • मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा
  • यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह खत्म करना होगा
  • लंबी दूरी की मिसाइलों का निर्माण रोकना होगा

हालांकि, ईरान के तल्ख तेवरों और बातचीत से इनकार के बाद अमेरिका ने अब इनमें से केवल दो शर्तों पर ही बात करने का फैसला किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि उनकी अब केवल दो ही मुख्य इच्छाएं हैं पहला यह कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए और दूसरा वहां लोगों को फांसी की सजा न दी जाए।

ईरान का रुख और क्षेत्रीय युद्ध की धमकी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि वे परमाणु हथियार बनाने की दिशा में नहीं बढ़ रहे हैं लेकिन वे अमेरिका द्वारा थोपी गई अन्य शर्तों को भी स्वीकार नहीं करेंगे। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि यदि ईरान पर कोई सैन्य हमला होता है, तो वे इसे एक 'क्षेत्रीय युद्ध' में बदल देंगे। इसका अर्थ है कि ईरान न केवल अमेरिकी ठिकानों बल्कि उसके क्षेत्रीय सहयोगियों जैसे बहरीन, जॉर्डन, सऊदी अरब, कतर और इजरायल को भी निशाना बना सकता है।

व्यापारिक संकट और सहयोगियों का इनकार

अमेरिका के बैकफुट पर आने का एक बड़ा कारण आर्थिक और रणनीतिक दबाव भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान के साथ युद्ध छिड़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के व्यापारिक मार्ग बंद हो जाएंगे, जिससे वैश्विक व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा।

हैरानी वाली बात यह है कि अमेरिका के करीबी सहयोगी देशों जैसे यूएई, तुर्की और सऊदी अरब ने जंग की स्थिति में अमेरिका को अपना सैन्य बेस देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। यही कारण है कि 'यूएसएस अब्राहम' और 'THAAD' मिसाइल सिस्टम की तैनाती के बावजूद, ट्रंप प्रशासन समझौते को ही बेहतर विकल्प मान रहा है।

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