

Election Commission SIR Notice to Arvind Kejriwal: दिल्ली की राजनीति में इस समय SIR को लेकर हलचल तेज है। चुनाव आयोग की ओर से आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के तहत नोटिस जारी किया गया है। मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी नोटिस मिला है। चुनाव आयोग ने दोनों नेताओं से जरूरी कागजात जमा करने के लिए कहा है।
जानकारी के मुताबिक, डिजिटल मैपिंग के दौरान सामने आई लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी यानी तार्किक विसंगति के बाद चुनाव आयोग ने संबंधित मतदाताओं से दस्तावेजों के जरिए स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दस्तावेज निर्धारित समय पर जमा नहीं करने की स्थिति में अरविंद केजरीवाल का नाम मतदाता सूची से हट सकता है?
दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत 31 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई थी। इस सूची में कुल 97,53,577 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 49,88,993 पुरुष, 47,64,137 महिला और 447 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की ओर से घर-घर जाकर किए गए सत्यापन के बाद कुल 47,56,722 मतदाताओं को ASDD (Absentee, Shifted, Dead and Duplicate) श्रेणी में रखा गया है। इनमें 43,32,775 ऐसे मतदाता हैं जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं या अनुपस्थित पाए गए। वहीं, 2,82,412 मतदाता मृत पाए गए और 1,41,535 मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज या डुप्लीकेट पाए गए।
चुनाव आयोग के मुताबिक, जिन मतदाताओं का पिछली मतदाता सूची से मिलान नहीं हो पाया है या जिनकी लिंकिंग में तार्किक विसंगतियां सामने आई हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। दिल्ली में ऐसे कुल 31,63,930 नोटिस तैयार कर वितरित किए जा रहे हैं। इन मामलों का निपटारा 29 अक्टूबर 2026 तक किया जाना है।
इसी प्रक्रिया के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के नाम नोटिस सूची में सामने आए। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। AAP नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक विरोधियों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है।
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि SIR की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जा रही है और इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं, उन्हें नोटिस देकर स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जा रहा है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका, जनप्रतिनिधियों और प्रमुख हस्तियों के नाम भी इस सत्यापन प्रक्रिया के दायरे में हैं। इसलिए केवल नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।