अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता पर जिनेवा में होगी बैठक (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

Nuclear Talks: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता का दूसरा दौर, जिनेवा में होगी बड़ी बैठक

US Iran Nuclear Meeting: अगले हफ्ते जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता का दूसरा दौर शुरू होगा। ट्रंप की चेतावनी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच यह बैठक कूटनीतिक रूप से बेहद अहम है।

प्रिया सिंह

US Iran Nuclear Program Negotiations: अमेरिका ईरान परमाणु कार्यक्रम वार्ता के तहत अगले सप्ताह स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। यह वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम से उपजे तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम है। स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस बैठक की पुष्टि करते हुए इसे शांति की एक नई कोशिश बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और ओमान की मध्यस्थता के बीच दुनिया भर की नजरें इस चर्चा पर टिकी हुई हैं।

वार्ता का आयोजन और ओमान की भूमिका

स्विट्ज़रलैंड के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को घोषणा की है कि अगले हफ्ते जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत होगी। इस महत्वपूर्ण वार्ता की मेजबानी ओमान देश द्वारा की जा रही है, जिसने इससे पहले हुए अप्रत्यक्ष संवाद में भी अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि अभी इस बैठक की सटीक तारीखों का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन तैयारी पूरी है।

ट्रंप की चेतावनी और तनाव का माहौल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता से पहले ईरान को बहुत ही सख्त चेतावनी देते हुए समझौते के लिए दबाव बनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि यह वार्ता विफल रहती है, तो इसके परिणाम ईरान के लिए अत्यंत भयावह और विनाशकारी हो सकते हैं। ट्रंप का मानना है कि ईरान को किसी भी कीमत पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

सैन्य तैनाती और परमाणु स्थलों पर खतरा

मिडिल ईस्ट में तनाव को देखते हुए अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड वहां भेज दिया है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही संकेत दे दिया है कि वे अपनी मांग मनवाने के लिए सैन्य बल का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेंगे। पिछले साल जून में वार्ता टूटने के बाद इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों तक भीषण युद्ध हुआ था।

ईरान का पक्ष और संवर्धन का मुद्दा

ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह अमेरिकी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है। पिछले साल हुए युद्ध से पहले ईरान 60 प्रतिशत शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था, जिससे परमाणु हथियार का खतरा बढ़ गया था। तेहरान ने साफ कहा है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह उसका करारा जवाब देने में सक्षम है।

ओमान की मध्यस्थता और पहली बैठक

6 फरवरी को आयोजित पहले दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता में ओमान ने दोनों पक्षों को एक मंच पर लाने में सफलता प्राप्त की थी। उस समय हुई चर्चा में पहली बार मिडिल ईस्ट के शीर्ष सैन्य कमांडर भी मौजूद थे, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। अब दूसरे दौर की बातचीत से उम्मीद की जा रही है कि कोई बीच का रास्ता निकल सकता है।

क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक संकट

खाड़ी देशों ने चेतावनी दी है कि ईरान पर कोई भी सैन्य हमला पूरे क्षेत्र को एक भीषण संघर्ष की आग में धकेल सकता है। ट्रंप ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और वहां सत्ता परिवर्तन को लेकर भी अपनी मंशा जाहिर कर दी है। ऐसे में जिनेवा की यह बैठक क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ा परीक्षण साबित होने वाली है।

समझौते की राह और भविष्य की चुनौतियां

फिलहाल अमेरिका का रुख बहुत कड़ा है और वह चाहता है कि ईरान अपनी सभी परमाणु गतिविधियों को तुरंत पूरी तरह बंद कर दे। ईरान ने फिलहाल इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है, जिससे वार्ता की सफलता पर गहरे संशय के बादल मंडरा रहे हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या फिर युद्ध की ओर।

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