राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

पुतिन के लिए बुरी खबर! यूक्रेन जंग के बीच हालात काबू से बाहर, कई इलाकों में लगी इमरजेंसी

Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध का तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच रूस के कई क्षेत्रों में संघीय स्तर पर इमरजेंसी लागू करने का निर्णय लिया गया है।

अमन उपाध्याय

Russia Agricultural Emergency: 28 सितंबर की रात रूस ने यूक्रेन पर लगातार 12 घंटे तक मिसाइल और ड्रोन से भीषण हमला किया। इस हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक 12 साल की बच्ची भी शामिल है। 70 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने जानकारी दी कि रूस ने एक ही रात में 500 ड्रोन और 40 से अधिक मिसाइलें दागीं। राजधानी कीव और दक्षिण-पूर्वी शहर जापोरिजझिया इस हमले से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।

इस हमले में सात जिलों में भारी तबाही हुई। जिसमें 14 लोग घायल हुए, जबकि आसपास के कीव ओब्लास्ट में 28 लोग घायल हुए, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। जापोरिज़झिया में भीषण मिसाइल हमले में 38 लोग घायल हुए, जिनमें तीन बच्चे हैं और दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। रात भर ईरानी शाहेद मॉडल ड्रोन से कई क्षेत्रों में दहशत फैली रही। कीव, ज़ापोरिज़झिया, खमेलनित्सकी और सुमी में विस्फोटों की आवाज़ें गूंजती रहीं। इस दौरान रूस के Tu-95 और MiG-31K बमवर्षक विमान भी उड़ते देखे गए, जिसके चलते पूरे यूक्रेन में हवाई अलर्ट जारी किया गया।

इमरजेंसी लागू करने का निर्णय

इसी बीच अब ये खबर आ रही है कि रूस की सरकार ने दक्षिणी रोस्तोव इलाके के कृषि क्षेत्र में संघीय स्तर पर इमरजेंसी लागू करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि खराब मौसम ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है, जिससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा है। इससे पहले जून में रोस्तोव ने सूखे की वजह से क्षेत्रीय कृषि आपातकाल घोषित किया था, ताकि किसान अपने नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा प्राप्त कर सकें।

नई योजनाओं को शुरू का रास्ता

रोस्तोव के गवर्नर यूरी स्ल्यूसर ने बताया कि संघीय स्तर पर घोषित आपातकाल किसानों की मदद के लिए नई योजनाओं को शुरू करने का रास्ता खोलेगा। उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा कि राष्ट्रपति और कृषि मंत्री ओक्साना लुत के साथ इस आपात स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई है। इसका पहला नतीजा प्राथमिकता वाले ऋणों की सीमा बढ़ाना है। अब सबसे अहम मुद्दा करीब 300 ऐसे मौजूदा ऋणों का विस्तार करना है, जिन्हें किसान समय पर चुका पाने में असमर्थ हैं।

स्थानीय प्रशासन का अनुमान है कि इस वर्ष प्रमुख कृषि इलाकों में करीब 10 लाख हेक्टेयर फसलें सूखा और ठंड झेलने से नष्ट हो गईं। इसका सीधा असर रूस के अनाज उत्पादन पर पड़ रहा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है। सोवेकॉन कंसल्टेंसी का कहना है कि खराब मौसम की वजह से 2015 के बाद पहली बार रोस्तोव रूस का नंबर-1 गेहूं उत्पादक क्षेत्र नहीं रहेगा। उसकी जगह अब पास का इलाका स्टावरोपोल शीर्ष पर पहुंच जाएगा।

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