Ukraine Deploys Robotic Infantry In Warfare: पिछले चार वर्षों से जारी रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है जो भविष्य के युद्धों की पूरी तस्वीर बदल सकता है। यूक्रेन ने पहली बार युद्ध के मैदान में अपने जांबाज सैनिकों के स्थान पर रोबोटिक सेना को तैनात किया है। यह कदम न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि तकनीकी रूप से भी इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
हाल ही में, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने 'रक्षा उद्योग कार्यकर्ता दिवस' के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक मिशन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि युद्ध के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी दुश्मन की स्थिति को पूरी तरह से 'मानवरहित प्लेटफार्मों' जमीनी प्रणालियों और ड्रोन्स के माध्यम से कब्जा लिया गया। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि रूसी कब्जे वाले सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया और यूक्रेन को अपनी पैदल सेना (Infantry) का उपयोग किए बिना और बिना किसी नुकसान के जीत हासिल हुई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन की 'NC-13' कंपनी के भीतर एक विशेष इकाई ने अब तक मोर्चे पर 100 से अधिक ऐसे हमलों को अंजाम दिया है। ये ऑपरेशन अब केवल छिटपुट घटनाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि अब इन्हें व्यवस्थित सैन्य अभियानों का रूप दे दिया गया है। इन अभियानों के जरिए दुश्मन के कर्मियों का सफाया करने के साथ-साथ उनके आश्रयों, कमांड पोस्टों और अन्य बुनियादी ढांचों को नष्ट किया जा रहा है।
यूक्रेनी सेना अब ऐसे भूमि रोबोटों और ड्रोन्स का उपयोग कर रही है, जिन्हें एक पायलट फ्रंट लाइन से कई मील दूर एक सुरक्षित स्थान से नियंत्रित करता है। 'NC13' यूनिट के कमांडर मायकोला 'मकर' ज़िनकेविच ने बताया कि उनके द्वारा संचालित मिशनों में बिना एक भी गोली चलाए दुश्मन के ठिकानों पर कब्जा किया गया है। ज़िनकेविच जमीनी आधारित रोबोटिक स्ट्राइक सिस्टम को संभालने के लिए जिम्मेदार हैं और उनका मानना है कि युद्ध के मैदान में रोबोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ना चाहिए।
कमांडर ज़िनकेविच ने भविष्य के युद्धों के बारे में अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा कि इंसानी जीवन अनमोल है जबकि रोबोट का खून नहीं बहता। उन्होंने जोर दिया कि रोबोटिक ग्राउंड सिस्टम को बहुत तेज गति से और बड़े पैमाने पर विकसित करने की आवश्यकता है।
शुरुआत में इन लैंड ड्रोन्स का उपयोग केवल घायलों को निकालने और रसद पहुंचाने के लिए किया जाता था लेकिन अब ये सक्रिय रूप से युद्ध में हिस्सा ले रहे हैं। ये पहियों या ट्रैक पर चलने वाले वाहन किसी भी मौसम में काम कर सकते हैं और इन्हें दुश्मन द्वारा ट्रैक करना या बीच में रोकना बहुत कठिन होता है।
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यूक्रेन ने अपनी इस रणनीति के पीछे एक बड़ी वजह का खुलासा किया है। कमांडर ज़िनकेविच के अनुसार, यूक्रेन के पास रूस की तुलना में कभी भी अधिक सैन्य बल नहीं होगा। रूस की विशाल सेना का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन ने 'तकनीक' को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है। लैंड ड्रोन्स न केवल भारी पेलोड ले जाने में सक्षम हैं बल्कि उनकी बैटरी लाइफ और मजबूती भी बड़े सैन्य वाहनों की तुलना में कहीं बेहतर है, जिससे वे युद्ध में लंबे समय तक टिके रहते हैं।