डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

ट्रंप ने दिया 'ग्रीन सिग्नल'... नेतन्याहू को मिल गई खुली छूट, क्या लेबनान में फिर छिड़ेगा महायुद्ध?

Trump Netanyahu Meeting: डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात के बाद अमेरिका ने हिजबुल्लाह पर हमले के लिए इजरायल को खुला समर्थन दे दिया है, जिससे लेबनान में भारी टेंशन का माहौल है।

अमन उपाध्याय

Donald Trump On Hezbollah: मध्य पूर्व में तनाव एक नए शिखर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ 'मार-ए-लागो' में हुई मुलाकात के बाद हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को अपनी मंजूरी दे दी है। ट्रंप का स्पष्ट संदेश है कि यदि लेबनानी सेना हिजबुल्लाह को निरस्त्र करने में विफल रहती है तो इजरायल को अमेरिका का पूर्ण सैन्य समर्थन मिलेगा।

यह बयान उस वक्त सामने आया है जब ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो में अहम बैठक हुई। बैठक से पहले ही ट्रंप ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि हिजबुल्लाह का रवैया लगातार आक्रामक और अस्वीकार्य रहा है, जबकि लेबनान की सरकार इस संगठन पर नियंत्रण रखने में कमजोर नजर आती है। ट्रंप के इन बयानों को इजरायल के लिए 'ग्रीन सिग्नल' के तौर पर देखा जा रहा है।

हिजबुल्लाह समर्थक खेमों में बेचैनी

बैठक के बाद लेबनान और हिजबुल्लाह समर्थक खेमों में बेचैनी साफ दिखाई देने लगी। हिजबुल्लाह समर्थित अखबार अल-अखबार ने लिखा कि ट्रंप-नेतन्याहू मुलाकात के प्रभावों का आकलन अभी मुश्किल है लेकिन 2026 की शुरुआत में क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वहीं, लेबनानी अखबार अल-जौम्हूरिया ने दावा किया कि अमेरिका ने इजरायल को हिजबुल्लाह के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने की हरी झंडी दे दी है।

लेबनान में हलचल तेज

इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद लेबनान की घरेलू राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सियासी दलों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो चुका है जबकि आम लोगों में भी संभावित संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस बीच हाल के हफ्तों में सीजफायर समझौते की निगरानी करने वाली समिति की कई अहम बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में इजरायल, लेबनान, अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और फ्रांस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे हैं। खास बात यह है कि पिछले महीने पहली बार दोनों देशों के नागरिक प्रतिनिधियों ने भी इन वार्ताओं में हिस्सा लिया।

अगले हफ्ते एक और उच्चस्तरीय बैठक

सूत्रों के मुताबिक, ये बातचीत सिर्फ युद्धविराम की निगरानी तक सीमित नहीं है बल्कि सीमा से जुड़े आर्थिक प्रोजेक्ट्स और सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है। अमेरिका का मानना है कि आर्थिक स्थिरता के जरिए हिजबुल्लाह के प्रभाव को कमजोर किया जा सकता है और सीमा पर स्थायी शांति सुनिश्चित की जा सकती है।

इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य लेबनानी सेना के जरिए हिजबुल्लाह को निरस्त्र करना और दोनों देशों के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि अगले हफ्ते एक और उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है, जिसमें सीजफायर और आर्थिक योजनाओं को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में लेबनान-इजरायल सीमा पर हालात और ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं।

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