वांशिगटन: विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखना अब और मुश्किल हो गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत सहित अन्य देशों के छात्रों और एक्सचेंज विजिटर वीजा के आवेदकों के लिए वीजा इंटरव्यू की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। यह कदम सोशल मीडिया गतिविधियों की सख्त जांच के इरादे से उठाया गया है। इसके अलावा हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के दाखिले पर भी रोक लगाने का फैसला किया है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह निर्णय फिलहाल अस्थायी है और उन छात्रों पर लागू नहीं होगा जिनकी वीजा इंटरव्यू की तारीख पहले से निर्धारित है। हालांकि, यदि यह प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहता है, तो इससे गर्मी और पतझड़ के सत्र में विश्वविद्यालयों और बोर्डिंग स्कूलों में प्रवेश की योजना बना रहे हजारों छात्रों पर प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नई नीति उन कार्यकारी आदेशों पर आधारित है जो आतंकवाद विरोधी उपायों और यहूदी-विरोध के खिलाफ कदम उठाने से जुड़े हैं। माना जा रहा है कि यह निर्णय हाल के महीनों में इजरायल और गाजा को लेकर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में हुए प्रदर्शनों के मद्देनजर लिया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों की भागीदारी रही है। पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने कुछ ऐसे छात्रों की सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच शुरू की थी जो इजरायल विरोधी प्रदर्शनों में शामिल पाए गए थे।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा हस्ताक्षरित एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार कि नई सोशल मीडिया जांच की विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने तक, कांसुलर कार्यालयों को नए स्टूडेंट और एक्सचेंज वीजा इंटरव्यू के लिए समय स्लॉट जोड़ने से रोका जाए। स्टेट डिपार्टमेंट की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा कि हम हर वीजा आवेदक की गहन जांच के लिए सभी संभव संसाधनों का उपयोग करेंगे चाहे वे छात्र हों या अन्य श्रेणियों के लोग।
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हाल ही में प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के दाखिले पर रोक लगाने का फैसला किया था, लेकिन अदालत ने इस फैसले को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। इसी वसंत में सरकार ने हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों का कानूनी दर्जा समाप्त कर दिया था, जिसके चलते कई छात्रों को देश छोड़ना पड़ा। हालांकि, बाद में अदालत के हस्तक्षेप से कुछ छात्रों को राहत मिली, लेकिन भविष्य में नियमों को और कड़ा कर दिया गया है।
इस निर्णय से अमेरिका में पढ़ाई की योजना बना रहे लाखों छात्रों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है। वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले से ही समय लेने वाली है, और अब सोशल मीडिया की जांच के कारण यह प्रक्रिया और अधिक जटिल और धीमी हो सकती है। भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और नाइजीरिया जैसे देशों के छात्र अमेरिकी उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह रुझान ऐसे ही बना रहा, तो अमेरिका का वैश्विक शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी स्थान खतरे में पड़ सकता है।