स्वेज नहर संकट, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

होर्मुज के बाद अब स्वेज नहर ब्लॉक करने की तैयारी, हूतियों ने दी रॉकेट हमले की धमकी; दुनियाभर में मचा हड़कंप

Iran War News: ईरान ने होर्मुज के बाद अब वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन 'स्वेज नहर' को बंद करने के लिए हूती विद्रोहियों को सक्रिय कर दिया है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।

अमन उपाध्याय

Suez Canal Threat Houthi Rebels: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वैश्विक व्यापार ठप होने की कगार पर है। ईरान ने अपनी युद्ध रणनीति को विस्तार देते हुए अब स्वेज नहर (Suez Canal) को निशाना बनाने की योजना बनाई है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बाद ईरान ने अपने सबसे शक्तिशाली प्रॉक्सी हूती विद्रोहियों को 12 दिनों के अंतराल के बाद फिर से सक्रिय कर दिया है।

स्वेज नहर पर हूतियों का खतरा

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे जल्द ही लाल सागर और स्वेज नहर के मार्ग पर रॉकेट से हमला कर सकते हैं। इस हमले का मुख्य उद्देश्य यमन और जिबूती के बीच स्थित बाब अल-मंडेब के माध्यम से होने वाले जहाजरानी कार्यों को पूरी तरह बाधित करना है। चूंकि स्वेज नहर लाल सागर के रास्ते से ही गुजरती है, जहां हूतियों का दबदबा है इसलिए यह खतरा वैश्विक शिपिंग कंपनियों के लिए नींद उड़ाने वाला है।

क्यों अहम है स्वेज नहर?

स्वेज नहर को यूरोप और मिडिल ईस्ट की 'लाइफलाइन' माना जाता है। दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत व्यापार इसी संकरे रास्ते से होता है। यह मार्ग यूरोप से एशिया तक की दूरी को लगभग 7,000 किलोमीटर कम कर देता है। यदि यह रास्ता बंद होता है तो कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक सामानों और सबसे महत्वपूर्ण तेल की आपूर्ति में भारी देरी और लागत में वृद्धि होगी। फिलहाल इस नहर पर मिस्र की अल-सीसी सरकार का नियंत्रण है, जो अमेरिका समर्थित है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था को संकट में डालना

ईरान की कोशिश है कि इस युद्ध को लंबा खींचा जाए ताकि दुनिया की अर्थव्यवस्था संकट में पड़ जाए। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर जंग लंबी खिंचती है, तो वे मिडिल ईस्ट से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे। होर्मुज स्ट्रेट के पहले से ही आंशिक रूप से बाधित होने के कारण मिडिल ईस्ट से तेल का निर्यात 20 प्रतिशत कम हो चुका है। ऐसे में स्वेज नहर को ब्लॉक करना ईरान के लिए एक बड़ा रणनीतिक हथियार साबित हो सकता है क्योंकि मिडिल ईस्ट के अन्य देश इसी रास्ते से यूरोप को तेल भेजने की तैयारी कर रहे थे।

भारत सहित कई देशों पर होगा सीधा असर

स्वेज नहर के चोक पॉइंट होने का सीधा और गहरा असर भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे एशियाई देशों के साथ-साथ फ्रांस और इटली जैसे यूरोपीय देशों पर पड़ेगा। भारत के लिए यह मार्ग निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से महंगाई में बेतहाशा बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

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