शेख हसीना के पास अब क्या है रास्ता, (डिजाइन फोटो)  
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...तो 60 दिन में फांसी पर लटका दी जाएंगी हसीना? अब बस ये एक कानून बचा सकता है जान, पढ़ें पूरी खबर

Sheikh Hasina Death Sentence: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ICT ने मौत की सजा सुनाई है। हसीना फिलहाल भारत में हैं और अब उनके सामने कौन-कौन से कानूनी विकल्प बचे हैं? आइए जानते हैं।

अमन उपाध्याय

Sheikh Hasina legal Options: बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा भूचाल तब आया जब इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने 17 नवंबर 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को तीन गंभीर मामलों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। ट्रिब्यूनल ने उन्हें 2024 में हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हुई 1,400 मौतों के लिए जिम्मेदार माना और ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ का दोषी ठहराया।

शेख हसीना पिछले एक वर्ष से अधिक समय से भारत में निर्वासन में हैं। 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में छात्रों के बड़े विद्रोह और हिंसा के बाद उन्हें दिल्ली शरण लेनी पड़ी थी। वहीं से वह लगातार बांग्लादेश की राजनीति और कानूनी घटनाक्रम पर नजर रख रही हैं। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस सजा के बाद उनके पास कानूनी रास्ते कौन से हैं और क्या वह अपनी सजा को चुनौती दे सकती हैं?

60 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपील

ICT एक्ट 1973 की धारा 21 के अनुसार, किसी भी दोषी को फैसले के 60 दिनों के भीतर अपील का अधिकार है। शेख हसीना को यह अपील बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय डिवीजन में करनी होगी। चूंकि वह भारत में हैं, इसलिए यह अपील उनके वकील दाखिल कर सकते हैं। लेकिन कोर्ट चाहे तो उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति मांग सकता है, जो उनके लिए सबसे बड़ी बाधा बन सकती है।

अगर अपील नहीं की गई तो क्या होगा?

अगर हसीना ने 60 दिनों के भीतर अपील नहीं की तो ICT द्वारा दी गई मौत की सजा अंतिम मानी जाएगी और उस पर अमल का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि अगर अपील सफल होती है तो या तो पुनः सुनवाई हो सकती है या सजा कम की जा सकती है।

क्या अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में अपील संभव है?

सीधे तौर पर नहीं। बांग्लादेश ICT का फैसला किसी इंटरनेशनल कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। हां, शेख हसीना संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति या अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 'निष्पक्ष सुनवाई न होने' की शिकायत कर सकती हैं। लेकिन ये शिकायतें सजा को रद्द नहीं करतीं, सिर्फ दबाव बनाती हैं।

ICT की क्या शक्तियां हैं?

यह अदालत देश की सबसे शक्तिशाली संस्थाओं में से एक मानी जाती है। इसे संसद द्वारा बनाए गए कानून के तहत स्थापित किया गया है, इसलिए इसके निर्णय तुरंत प्रभावी होते हैं और प्रशासन व पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ती है। ट्रिब्यूनल को यह अधिकार है कि वह किसी भी व्यक्ति चाहे वह मंत्री हो, सांसद हो या पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सके, मुकदमा चला सके और सजा भी सुनाए।

क्या उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है?

भारत में होने की वजह से शेख हसीना की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण बांग्लादेश के लिए आसान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट उनकी अनुपस्थिति में अपील सुनने पर सहमत होता है या नहीं यही उनके भविष्य का फैसला तय करेगा।

भारत उन्हें सौंपेगा या नहीं?

बांग्लादेश 2024 से भारत पर प्रत्यर्पण का दबाव बना रहा है। लेकिन 2013 की प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत राजनीतिक मामलों में आरोपित व्यक्ति को सौंपने से इनकार कर सकता है। भारत हसीना को “सुरक्षा कारणों” से संरक्षण दे रहा है और प्रत्यर्पण पर फैसला दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकता है।

क्या है प्रत्यर्पण संधि ?

प्रत्यर्पण कानून वह व्यवस्था है जिसके तहत कोई देश, दूसरे देश के आग्रह पर  ऐसे व्यक्ति को उसके हवाले करता है जिस पर वहां अपराध करने का आरोप हो या जिसे वहां की अदालत ने दोषी ठहराया हो। भारत में इसकी पूरी प्रक्रिया प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 के अनुसार चलती है। इसके तहत भारत न केवल अपने यहां छिपे अपराधियों को दूसरे देशों को सौंप सकता है, बल्कि विदेशों में मौजूद अपराधियों को भारत भी बुला सकता है। आम तौर पर यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच बनी प्रत्यर्पण संधि पर आधारित होती है, लेकिन कई बार संधि न होने पर भी घरेलू कानूनों के आधार पर प्रत्यर्पण किया जा सकता है।

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