सऊदी अरब में 6 महीने में 180 लोगों फांसी की सुनाई गई (फोटो- सोशल मीडिया)  
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सऊदी ने 6 महीने में 180 लोगों को सुनाई फांसी की सजा, जुर्म जानकार रह जाएंगे दंग

सऊदी अरब में 2023 में 345 मौत की सजाएँ दी गईं, जो पिछले 30 वर्षों में सबसे अधिक हैं। 2025 तक फांसी की संख्या बढ़ने की आशंका है। अधिकांश सजाएँ नशे से जुड़े गैर-हिंसक अपराधों के लिए हैं।

अक्षय साहू

रियाद: सऊदी अरब के कानून को दुनिया का सबसे सख्त कानून माना जाता है। इसकी झलक पिछले 6 महीनों में देश में दी गई फांसी की सजा से पता चलती है। सऊदी में पिछले 6 महीनों में 180 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चिंता जताई है, क्योंकि इनमें से अधिकांश जुर्म ऐसे हैं जिनके लिए दूसरे देशों में मामूली चालान लगाकर छोड़ दिया जाता है।

जानकारी के मुताबिक, साल 2023 में सऊदी अरब में कुल 345 लोगों को मौत की सजा दी गई, जो पिछले 30 साल में सबसे ज्यादा है। वहीं, इस साल के पहले छह महीने में ही 180 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सऊदी में दी जाने वाली इन फांसी की सजाओं पर चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि अगर यही रफ्तार रही, तो 2025 में यह नया रिकॉर्ड बन सकता है।

अधिकतर मामले नशे से जुड़े हुए

मानवाधिकार संगठन 'रीप्राइव' के अनुसार, 2025 में सऊदी अरब में लगभग दो-तिहाई फांसी की सजा नशे से संबंधित मामलों में दी गई है। ये मामले ऐसे थे जिनमें किसी की जान नहीं गई थी। संगठन ने चिंता जताई है कि गैर-हिंसक अपराधों के लिए इतनी कठोर सजा देना गलत है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि नशे के मामलों में मौत की सजा पाने वालों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। संगठन ने आरोप लगाया कि सजा पाने वाले अधिकतर लोगों को अपनी कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए वकील मुहैया कराया गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, इस साल सऊदी अरब में जिन लोगों को फांसी दी गई, उनमें आधे से अधिक विदेशी नागरिक थे।

विजन 2030 के तहत हो सकते हैं बदलाव

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सऊदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपने विजन 2030 कार्यक्रम के आड़ में सख्ती कर रही है। सऊदी में 2030 में डिफेंस एक्सपो होने वाला है, इसके अलावा 2034 में यहां फीफा वर्ल्ड कप होना तय है। इसके चलते सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान कई तरह के बदलाव कर रहे हैं, जिसमें महिलाओं को गाड़ी चलाने की आजादी और देश में शराब पर पाबंदी को खत्म करना शामिल है। मानवाधिकार संगठनों को उम्मीद है कि इसके तहत फांसी की सजा में भी बदलाव हो सकते हैं।

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