सऊदी अरब के साथ खड़ा हुआ पाकिस्तान, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

'पंच' से 'पार्टी' बना पाकिस्तान! सऊदी अरब पर ईरानी हमलों के बाद बदला रुख, कहा- जंग बढ़ी तो हम रियाद के साथ

Pakistan Sides Saudi: ईरान-सऊदी संघर्ष में मध्यस्थता कर रहे पाक ने अब रियाद का पक्ष ले लिया है। सऊदी ऊर्जा केंद्रों पर ईरानी हमलों की निंदा करते हुए डिफेंस पैक्ट के तहत सैन्य साथ देने का ऐलान किया है।

अमन उपाध्याय

Pakistan Sides Saudi Arabia Iran War: मध्य-पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच दक्षिण एशिया के अहम खिलाड़ी पाकिस्तान के रुख में एक बड़ा बदलाव आया है। अब तक ईरान और सऊदी अरब के बीच 'पंच' यानी मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा करने वाला पाकिस्तान अब खुलकर सऊदी अरब के पाले में खड़ा नजर आ रहा है।

ईरान द्वारा सऊदी अरब के रणनीतिक ऊर्जा केंद्रों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद पाकिस्तान ने अपनी तटस्थता छोड़ते हुए तेहरान की कड़ी आलोचना की है और स्पष्ट किया है कि यदि जंग आगे बढ़ती है तो वह अपने रक्षा समझौते के तहत रियाद का साथ देगा।

सऊदी के औद्योगिक केंद्र पर हमला

ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब ईरान ने सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र में स्थित जुबैल (Jubail) के विशाल औद्योगिक क्षेत्र को निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने वहां स्थित एक पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, विशेष रूप से सऊदी बेसिक इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (SABIC) के प्लांट को भारी नुकसान पहुंचाया है। धमाके इतने जोरदार थे कि पूरे औद्योगिक शहर में उनकी गूंज सुनी गई और प्लांट में भीषण आग लग गई। हालांकि, एहतियात के तौर पर मजदूरों को पहले ही सुरक्षित निकाल लिया गया था लेकिन इस हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।

पाकिस्तान का कड़ा रुख

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन हमलों को सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। पाकिस्तान ने इसे 'एक खतरनाक तनाव' बताया है जो क्षेत्रीय शांति को अस्थिर कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान ने अपनी पुरानी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अटूट समर्थन जारी रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा 'डिफेंस पैक्ट' के कारण पाकिस्तान को अब सीधे तौर पर इस युद्ध का हिस्सा बनना पड़ सकता है।

मध्यस्थता की कोशिशों को लगा झटका?

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के साथ मिलकर लंबे समय से इस संघर्ष को रोकने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें कर रहा था। इस्लामाबाद में स्थित ईरानी राजदूत रजा अमीरी मोघदम ने हाल ही में कहा था कि पाकिस्तान के नेतृत्व में चल रही शांति की कोशिशें एक 'अहम' मोड़ पर पहुंच रही हैं। लेकिन अब पाकिस्तान द्वारा खुलकर सऊदी अरब का पक्ष लेने से इन शांति वार्ताओं के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं।

महायुद्ध का खतरा बढ़ा

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दी गई डेडलाइन खत्म होने के बेहद करीब है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शर्तें नहीं मानी गईं तो 'आज रात एक सभ्यता खत्म हो जाएगी।' पाकिस्तान के इस ताजा रुख ने ईरान की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है क्योंकि उसे अब न केवल अमेरिका और इजरायल, बल्कि अपने पड़ोसी पाकिस्तान के कड़े विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है।

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