अफगान तालिबान के आगे झुका पाकिस्तान (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

अफगान तालिबान के आगे झुका पाकिस्तान: व्यापार बहाल करने के लिए बनाई 13 सदस्यीय संयुक्त कमेटी

Afghan Border Reopening: पाक और अफगान ने व्यापारिक सीमा खोलने के लिए 13 सदस्यीय संयुक्त समिति बनाई है। टीटीपी विवाद के कारण अक्टूबर से बंद बॉर्डर अब आर्थिक दबाव के चलते दोबारा खुलने की उम्मीद है।

प्रिया सिंह

Pakistan Afghan Joint Committee Border Trade: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कई महीनों से जारी व्यापारिक गतिरोध अब खत्म होता नजर आ रहा है क्योंकि पाकिस्तान ने अपने कड़े रुख में नरमी दिखाई है। दोनों देशों ने सोमवार, 5 जनवरी 2026 को सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने के लिए 13 सदस्यीय एक उच्च स्तरीय संयुक्त समिति का गठन किया है।

अक्टूबर 2025 में सीमा पर हुई हिंसक झड़पों और टीटीपी (TTP) आतंकियों को पनाह देने के आरोपों के बाद से ही व्यापारिक मार्ग पूरी तरह बंद थे। अब आर्थिक तंगी और व्यापारियों के भारी नुकसान को देखते हुए पाकिस्तान सरकार तालिबान प्रशासन के साथ बातचीत की मेज पर वापस लौट आई है।

व्यापार बहाली के लिए संयुक्त कमेटी

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार इस नई समिति में पाकिस्तान के छह और अफगानिस्तान के सात प्रमुख बिजनेस लीडर्स को शामिल किया गया है जो सीमा प्रबंधन की बाधाओं को दूर करेंगे। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सैयद जवाद हुसैन काजमी ने बताया कि बातचीत का प्राथमिक उद्देश्य तोरखम और अन्य महत्वपूर्ण चौकियों के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करना है। पाकिस्तान सरकार ने इस कमेटी को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने की पूरी अथॉरिटी दी है ताकि विवादों का स्थायी समाधान निकल सके।

आर्थिक नुकसान और कूटनीतिक दबाव

पिछले साल अक्टूबर से सीमा बंद होने के कारण दोनों देशों के व्यापारियों को करोड़ों डॉलर का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है और आम जनता के लिए आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है। पाकिस्तान ने शुरू में शर्त रखी थी कि जब तक टीटीपी का मुद्दा नहीं सुलझता तब तक सीमा नहीं खोली जाएगी लेकिन गिरती अर्थव्यवस्था ने उसे झुकने पर मजबूर कर दिया। तुर्की, कतर और यूएई जैसे देशों ने भी दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिशें की थीं जो अब व्यापारिक मोर्चे पर रंग लाती दिख रही हैं।

टीटीपी और सुरक्षा का मुख्य विवाद

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की असली जड़ तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) है जिसे पाकिस्तान के अनुसार अफगान जमीन से समर्थन मिल रहा है। पाकिस्तान लगातार तालिबान सरकार से इस बात का लिखित आश्वासन मांग रहा है कि उसकी धरती का इस्तेमाल पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले के लिए नहीं किया जाएगा। हालांकि तालिबान ने इन आरोपों को हमेशा खारिज किया है जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध बेहद निचले स्तर पर पहुंच गए थे और सीमा पर झड़पें हुई थीं।

सीमा चौकियों के खुलने की उम्मीद

व्यापारियों और जनता की समस्याओं को देखते हुए काजमी ने उम्मीद जताई है कि तोरखम सीमा के फिर से खुलने से दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की नई शुरुआत होगी। इस व्यापारिक मार्ग के सक्रिय होने से न केवल अफगानिस्तान की खाद्य सुरक्षा बेहतर होगी बल्कि पाकिस्तान के निर्यातकों को भी बड़ी राहत मिलने की संभावना है। यदि यह बातचीत सफल रहती है तो यह दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय व्यापारिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है जिससे तनाव कम होगा।

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