Historic Nepal Tunnel Rescue: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और मलबे की तबाही के बीच त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो मजदूरों को नौ दिन बाद सुरक्षित जिंदा बाहर निकाल लिया गया। करीब 240 घंटे तक अंधेरी और मलबे से घिरी सुरंग में फंसे रहने के बाद दोनों की जिंदगी बचाना रेस्क्यू टीम के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। बाहर आते ही डॉक्टरों और आपातकालीन कर्मियों ने दोनों की मेडिकल जांच शुरू की।
बचाए गए मजदूरों में सप्तरी के रहने वाले मैकेनिकल फोरमैन संजय साह भी शामिल हैं। वह प्रोजेक्ट के कंट्रोल रूम में काम करते थे। संजय के मुताबिक, हादसे के समय सुरंग के आसपास करीब 40 से 45 लोग मौजूद थे।
खतरे का पता चलते ही संजय ने दूसरे कर्मचारियों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। इसी दौरान अचानक सुरंग में पानी भरने लगा और बाहर निकलने के रास्ते बंद हो गए। दूसरों की मदद करते-करते वह खुद अंदर फंस गए।
संजय ने बताया कि सुरंग के जिस हिस्से में वह फंसे थे, वहां उनके साथ करीब 6 अन्य लोग भी थे। वे लगातार एक-दूसरे से बातचीत करते रहे, जिससे मुश्किल समय में उनका हौसला बना रहा।
करीब 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग के अंदर 9 दिन तक रहना बेहद चुनौतीपूर्ण था। न रोशनी थी, न पर्याप्त भोजन और पानी। इस कठिन परिस्थिति में संजय साह और उनके साथियों ने हिम्मत बनाए रखने के लिए लगातार हरे कृष्ण महामंत्र का जाप किया।
संजय को भरोसा था कि बाहर मौजूद बचाव दल उन्हें ढूंढने में कामयाब होगा। उनके अनुसार, सुरंग के अंदर सांस लेने के लिए पर्याप्त हवा मौजूद थी। वहीं, आसपास जमा पानी ने भी उन्हें लंबे समय तक जीवित रहने में मदद की।
बचाव अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को सुरंग के सर्च शाफ्ट के अंदर से कुछ आवाजें सुनाई दीं। इसके बाद टीमों ने तुरंत उस दिशा में मलबा हटाने का काम शुरू किया। लगातार प्रयासों के बाद संजय साह और कबीर महारजन तक पहुंच बनाई गई और दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
दोनों के बाहर आने के बाद डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य जांच की। इतने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में रहने के बावजूद उन्हें जीवित बचा लेना राहत और बचाव अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
संजय के साथ काठमांडू के रहने वाले कबीर महारजन को भी सुरंग से सुरक्षित निकाला गया। कबीर पिछले सात वर्षों से त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे।
कबीर की पत्नी हीरा शोभा ने बताया कि पिछले कई दिनों से परिवार बेहद परेशान था। उन्हें उम्मीद थी कि उनके पति सुरंग के अंदर सुरक्षित होंगे। कबीर के जिंदा बाहर आने के बाद परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
नेपाल के ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने सफल रेस्क्यू के बाद कहा कि जब तक सांस है, तब तक जीवन की उम्मीद बनी रहती है। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि बेहद कठिन परिस्थितियों में भी बचाव अभियान को जारी रखना कितना महत्वपूर्ण है।
त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और आसपास के प्रभावित इलाकों में अभी भी अन्य लापता लोगों की तलाश जारी है। सेना, पुलिस और राहत दल मलबे और सुरंगों में सघन सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।