Brave Nepal Flood Survivors: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस प्राकृतिक आपदा में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत और करीब 5000 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोने के बावजूद दूसरों की मदद का रास्ता चुना। ये नेपाल फ्लड सर्वाइवर राहत, खाना और बचाव अभियानों में जुटकर इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं।
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद अचानक आई भीषण बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों और कस्बों को तबाह कर दिया। रसुवा जिले के 31 वर्षीय सुदीप कुमार न्यूपाने भी इस आपदा की चपेट में आए।
बाढ़ के दौरान सुदीप लोगों को खतरे से बचने के लिए सचेत कर रहे थे। इसी दौरान वह अपने 27 वर्षीय भाई प्रदीप और साथी जनक के साथ तेज पानी के बहाव में फंस गए। सुदीप किसी तरह पहाड़ी की ओर पहुंचकर अपनी जान बचाने में सफल रहे, लेकिन प्रदीप और जनक पानी में बह गए।
भाई और साथी को खोने के बाद सुदीप करीब दो दिनों तक सदमे में रहे। इसके बाद उन्होंने खुद को संभाला और रसुवा में विस्थापित लोगों तक खाना और राहत सामग्री पहुंचाने के अभियान में शामिल हो गए।
स्थानीय सरकारी विभागों में कर्मचारियों की कमी के कारण उन्होंने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। सुदीप का कहना है कि वह अपनी किस्मत से बचे हैं और जब तक जीवित हैं, जरूरतमंद लोगों की मदद करते रहेंगे। उनकी सेवा भावना से दूसरे बाढ़ पीड़ित भी राहत कार्यों में शामिल होने के लिए प्रेरित हुए।
पड़ोसी नुवाकोट में सुचित जोशी भी खोज और बचाव अभियान में सुरक्षा बलों के साथ लगातार काम कर रहे हैं। इस आपदा ने उनके अपने परिवार को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। उनकी पत्नी, सात साल की बेटी, भाभी और भतीजा अब तक लापता हैं।
तलाशी अभियान के दौरान जोशी को उनके चाचा और एक अन्य भतीजा मिल गए। इसके बाद पांच और लोग उनकी टीम से जुड़ गए और निजी तलाश धीरे-धीरे सामुदायिक बचाव अभियान में बदल गई।
बचाव अभियान के दौरान जोशी और उनकी टीम ने तेज बहाव में फंसी एक बुजुर्ग महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। अपने परिवार के सदस्यों की तलाश के बीच भी दूसरों की जान बचाने की उनकी कोशिश बताती है कि आपदा के समय इंसानियत किस तरह सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
सुचित जोशी अब भी सुरक्षा बलों के साथ त्रिशूली नदी के किनारे अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। अभियान के दौरान नदी से तीन बुरी तरह क्षतिग्रस्त शव भी बरामद हुए हैं, लेकिन उनकी पहचान अभी नहीं हो सकी है।
अपने परिवार को लेकर अनिश्चितता और गहरे दर्द के बावजूद जोशी ने बचाव कार्य नहीं छोड़ा। नेपाल के सुदीप और सुचित जैसे नेपाल फ्लड सर्वाइवर यह दिखाते हैं कि भारी त्रासदी के बीच भी उम्मीद, साहस और मानवता जिंदा रह सकती है।