सहारनपुर मस्जिद विवाद: जमीन किसकी है, मस्जिद कितनी पुरानी और बुलडोजर क्यों चला? समझें पूरी कहानी

Saharanpur Mosque Demolition: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की। अदालत ने जमीन को सरकारी और निर्माण को अवैध माना था, मस्जिद कमेटी इसे पुरानी वक्फ संपत्ति बताती है।
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सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरणSocial Media
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Saharanpur Mosque Demolition Story: यूपी में चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। सहारनपुर में आज सुबह करीब 4 बजे प्रशासन का एक्शन शुरू हुआ और 6 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को गिराने के लिए बुलडोजर पहुंच गए। मस्जिद गिराने के लिए बुलडोजर पहुंचने के बाद देखते ही देखते इलाके में पुलिस का पहरा बढ़ा दिया गया। कलेक्ट्रेट के सभी गेट भी बंद कर दिए गए। इस काम में चार बुलडोजर लगाए गए और मस्जिद के हिस्से को ढहाने के बाद मलबा नगर निगम की गाड़ियों में भरकर हटाया जाने लगा।

ये मामला महज बुलडोजर एक्शन की कहानी से जुड़ा नहीं है। इसको लेकर पीछले करीब डेढ़ साल से जमीन और निर्माण का कानूनी विवाद चल रहा है। अदालत के आदेशों के मुताबिक, यह जमीन सरकारी है और यहां बनी मस्जिद को अवैध निर्माण माना गया है। वहीं मस्जिद कमेटी और विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि ये मस्जिद 100 साल से भी अधिक पुरानी है और उसके पास पुराने दस्तावेज भी मौजूद हैं।

इस पूरे मामले में एक और ट्विस्ट है 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति का। मस्जिद कमेटी के बयान से कलेक्ट्रेट परिसर में बुलडोजर चलने तक, आइए पूरी कहानी समझते हैं।

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कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद का विवाद

सहारनपुर के जिला कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद इस मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद लगभग डेढ़ साल पुराना है। प्रशासन की दलील थी कि जिस जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया है, वो सरकारी भूमि है। इसी आधार पर सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में यह मामला पहुंचा।

सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने 16 जुलाई को इस मामले में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित जमीन को सरकारी भूमि माना और मस्जिद को अवैध बताया। साथ ही परिसर खाली करने का आदेश भी कोर्ट द्वारा दिया गया।

कोर्ट के इसी फैसले के बाद विवाद और ज्यादा बढ़ गया। क्योंकि मस्जिद कमेटी का दावा था कि ये कोई नया निर्माण नहीं है। कमेटी की तरफ से दावा किया गया कि मस्जिद लगभग 150 साल पुरानी है। कमेटी के अनुसार, यह जमीन और मस्जिद अचानक हाल के वर्षों में नहीं बनाई गई थी, बल्कि वहां लंबे वक्त से धार्मिक गतिविधियां होती रही थीं।

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एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (सौजन्य-सोशल मीडिया)

 AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बुलडोजर कार्रवाई के बाद दावा किया कि मस्जिद कमेटी ने 1911 तक के रिकॉर्ड अदालत में पेश किए थे और वहां एक सदी से भी ज्यादा समय से लगातार नमाज पढ़े जाने की बात कही। वहीं प्रशासन और अदालत के आदेश के मुताबिक, कोर्ट ने इन दावों के समर्थन में पर्याप्त कानूनी साक्ष्य नहीं माना।

क्या है 6 करोड़ 41 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का मामला?

मस्जिद विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है 6,41,65,565 रुपये। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा विवादित परिसर को सरकारी भूमि मानते हुए मस्जिद को अवैध निर्माण माना गया। कोर्ट के आदेश में परिसर खाली करने के साथ-साथ 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि भी तय की गई है।

अब मामला महज जमीन खाली कराने तक ही सीमित नहीं था। प्रशासन की तरफ से यह भी माना गया कि सरकारी भूमि के उपयोग से संबंधित नुकसान या जमीन कब्जे के एवज में क्षतिपूर्ति भी तय की जानी चाहिए।

मस्जिद कमेटी द्वारा इस आदेश को चुनौती दी गई। कमेटी का तर्क था कि जमीन को वक्फ संपत्ति माना जाना चाहिए और मस्जिद लंबे वक्त से वहां मौजूद है। इसी के साथ कमेटी ने आगे की कानूनी लड़ाई जारी रखी।

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जिला अदालत में क्या हुआ?

खिलाफ मस्जिद कमेटी ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के जिला अदालत में अपील दायर की। यहां मामला जिला जज सतेंद्र कुमार की कोर्ट में पहुंचा। 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई के आदेश को बरकरार रखा। इसी आदेश के आदार पर प्रशासन ने आगे की कार्रवाई की।

प्रशासन की ओर से कहा गया कि निचली अदालत के आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी की फर्स्ट अपील भी खारिज हो चुकी है। कोर्ट के आदेश के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक, कलेक्ट्रेट में स्थित मस्जिद को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने अवैध बताया था और उसके खिलाफ मस्जिद कमेटी की फर्स्ट अपील भी खारिज हो गई। इसी के बाद प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रहा है।

शुक्रवार रात से ही बढ़ गई थी हलचल

2 सितंबर को अदालत का आदेश आने के बाद मस्जिद को लेकर तनाव और राजनीतिक हलचल पहले ही बढ़ गई थी। शुक्रवार को जैसे-जैसे रात बढ़ी, कलेक्ट्रेट के आसपास पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ती चली गई। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी बढ़ती हलचल को देखते हुए देर रात लाइव आकर मस्जिद मामले पर अपनी बात रखी।

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तड़के 4 बजे शुरू हुआ बुलडोजर एक्शन

रातभर रही हलचल के बाद शनिवार तड़के करीब 4 बजे ही प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में बाहरी लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई। कलेक्ट्रेट के सभी प्रमुख गेट भी बंद कर दिए गए थे। पुलिस की भारी तैनाती के बीच एक-एक करके बुलडोजर मस्जिद तक पहुंचे और लगभग 6 बजे ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। इस कार्रवाई में चार बुलडोजर लगाए गए थे।

बुलडोजर ने देखते ही देखते मस्जिद की दीवारों और निर्माण के दूसरे हिस्सों को गिराना शुरू किया और सुबह होने तक मस्जिद का एक हिस्सा गिराया जा चुका था। इसके बाद तत्काल नगर निगम की गाड़ियों से मलबा हटाने का काम भी शुरू कर दिया गया। मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात रही। 

सपा सांसद को किया गया हाउस अरेस्ट 

मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई से पहले राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई थी। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उनको सहारनपुर जाने से रोकने के लिए रात में ही उनके कैराना स्थित आवास पर भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया और उनको हाउस अरेस्ट कर दिया गया।

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सपा सांसद को किया गया हाउस अरेस्ट Social Media

इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मिलना चाहती थीं और स्थानीय लोगों की बात उनके सामने रखना चाहती थीं। लेकिन उनको हाउस अरेस्ट करके घर से बाहर निकलने नहीं दिया गया।

विवाद की असली जड़ क्या है?

सहारनपुर मस्जिद विवाद को समझने के लिए तीन सवाल सबसे अहम हैं। पहला सवाल है- विवादित जमीन आखिर किसकी है? प्रशासन और सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने इसे सरकारी भूमि माना है, जबकि मस्जिद कमेटी लंबे समय से इसे वक्फ संपत्ति बताती रही है। दूसरा सवाल मस्जिद की उम्र और पुराने दस्तावेजों से जुड़ा है। मस्जिद पक्ष का दावा है कि उसके पास वर्ष 1911 के रिकॉर्ड मौजूद हैं और मस्जिद इससे भी पुरानी है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अदालत में इन दावों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं माना गया।

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल है, क्या अदालत का आदेश ही इस मामले की अंतिम कानूनी स्थिति है? 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने मस्जिद कमेटी की फर्स्ट अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। हालांकि, मस्जिद पक्ष और विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे इस मामले में आगे भी अदालत का रुख करेंगे। यानी फिलहाल कानूनी लड़ाई खत्म होती नजर नहीं आ रही है।

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इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन की कार्रवाई जारी है और मलबा हटाने का काम किया जा रहा है।

पुलिस सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर भी नजर रख रही है। दूसरी ओर, मस्जिद कमेटी और विपक्षी नेता प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।

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