फ्रांस में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर मोलोटोव कॉकटेल से हमला किया (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Molotov Cocktail: क्या है मोलोटोव कॉकटेल? जिससे पेरिस में पुलिस पर हुआ हमला? जानें इसका इतिहास

Molotov Cocktail Meaning: फ्रांस की राजधानी पेरिस में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर मोलोटोव कॉकटेल फेंके गए, जिसमें एक अधिकारी आग की चपेट में आ गया। जानिए क्या है यह हथियार और इसका नाम कैसे पड़ा।

अक्षय साहू

Highlights:

  • पेरिस में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर मोलोटोव कॉकटेल फेंके गए

  • घटना में एक पुलिस अधिकारी आग की चपेट में आ गया

  • इस हथियार का नाम सोवियत विदेश मंत्री व्याचेस्लाव मोलोटोव के नाम पर पड़ा

Paris Protest Violence France: यूरोप के कई देशों में महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कहीं युव खराब शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरकप प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कहीं जनता मकान के आसमान छूते किराए के विरोध में सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक रखा है। फ्रांस में भी पिछले कुछ हफ्तों से बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं।

इसी बीच पेरिस में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों पर मोलोटोव कॉकटेल फेंके। इस घटना में एक पुलिसकर्मी आग की चपेट में आ गया। इसके बाद फ्रांस में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। ऐसे में आइए जानते हैं कि मोलोटोव कॉकटेल क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा।

पेरिस में प्रदर्शन के दौरान हिंसा

31 अक्टूबर को फ्रांस में लगातार तीसरे सप्ताह हजारों लोग विरोध प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती से जुड़ी थीं। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में करीब 3.20 लाख लोगों ने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया।

हालांकि, अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। पेरिस में कुछ उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर, बोतलें और मोलोटोव कॉकटेल फेंके। इस दौरान एक सुरक्षा अधिकारी आग की चपेट में आ गया।

क्या होता है मोलोटोव कॉकटेल?

मोलोटोव कॉकटेल एक प्रकार का आग लगाने वाला हथियार है, जिसे आमतौर पर पेट्रोल बम भी कहा जाता है। इसका इस्तेमाल दंगों, युद्ध और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान किया जाता रहा है। इसे फेंकने से आग फैल सकती है, जिससे लोगों के साथ-साथ वाहनों और इमारतों को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

इस हथियार का नाम सोवियत संघ के तत्कालीन विदेश मंत्री व्याचेस्लाव मोलोटोव के नाम पर पड़ा। 1939-40 के सोवियत-फिनलैंड युद्ध के दौरान फिनलैंड के लोगों ने सोवियत हमलों के खिलाफ इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने व्यंग्यात्मक रूप से इसे 'मोलोटोव कॉकटेल' नाम दिया, जो बाद में दुनियाभर में प्रचलित हो गया।

हिंसक प्रदर्शनों में क्यों होता है इस्तेमाल?

मोलोटोव कॉकटेल का इस्तेमाल उन घटनाओं में देखा गया है, जहां विरोध प्रदर्शन हिंसक हो जाते हैं और प्रदर्शनकारी सुरक्षा बलों या सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाते हैं। कम संसाधनों में तैयार किया जा सकने वाला यह आग लगाने वाला हथियार लोगों की जान और सार्वजनिक संपत्ति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

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