

फ्रांस में महंगाई और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए
पेरिस में पुलिस ने 1,300 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
फ्रांस के गृह मंत्रालय ने 34 दुकानों में तोड़फोड़ की जानकारी दी
France Cost of Living Crisis: फ्रांस के कई शहरों में इन दिनों खराब शिक्षा व्यवस्था और बढ़ती महंगाई को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। शनिवार को राजधानी पेरिस समेत देश के लगभग हर बड़े शहर में लाखों लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें भी देखने को मिलीं।
पेरिस में सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1,300 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी बात सुनने की जगह दमन की नीति अपना रही है। पुलिस ने शनिवार को हिंसक होते प्रदर्शन को काबू में करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज किया। सोशल मीडिया पर फ्रांस प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
पेरिस में पुलिस ने साइंसेज पो संस्थान में रास्ता रोककर बैठे छात्रों को हटाने के लिए पहले लाठीचार्ज किया और फिर उन्हें घसीटकर रास्ते से हटाया। वायरल हो रहे वीडियो में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। इसी बीच सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों के एक समूह की ओर बढ़ते हुए देखा जा सकता है। सुरक्षा बल ने कुछ लोगों को रेलिंग की तरफ धकेला और एक व्यक्ति को जमीन पर गिरा दिया।
इसके अलावा एक अन्य वीडियो में पुलिस मार्केट एरिया में एक प्रदर्शनकारी को दौड़ाकर जमीन पर गिराते और फिर उसे अंधाधुंध पीटते नजर आ रही है। इसके अलावा एक अन्य वीडियो में पुलिस और प्रदर्शनकारियों को भिड़ते नजर आ रहे हैं। इमैनुएल मैक्रों सरकार ने प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पुलिस के अलावा सुरक्षा बलों के 70 हजार के अधिक जवानों को तैनात किया है।
फ्रांस के गृह मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान पेरिस में करीब 34 दुकानों में तोड़फोड़ की गई है। साथ ही दुकानों को लूट लिया गया। मंत्रालय ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि शनिवार को हुए प्रदर्शनों के दौरान 53 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में आयोजित 298 प्रदर्शनों में लगभग 4.10 लाख लोग शामिल हुए।
वहीं, इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ट्रेड यूनियन 'जनरल कॉन्फेडरेशन ऑफ लेबर' (CGT) ने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 8 लाख से भी अधिक थी। संगठन ने प्रदर्शन को सफल बताया और कहा कि सरकार को उनकी बात सुननी ही पड़ेगी। प्रदर्शनकारियों द्वारा पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान सरकार ने जांच शुरू कर दी है।