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मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बने बांग्लादेश के नये राष्ट्रपति, भारत पर क्या है इनका रुख?

Bangladesh New President: 1971 में जब बांग्लादेश की आजादी के लिए आंदोलन चलाया गया था, तब उन्होंने वामपंथी स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

अर्पित शुक्ला

Bangladesh New President Mirza Fakhrul Islam: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर गुरुवार को देश के 23वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। संसद यानी जातीय संसद में हुए चुनाव में आलमगीर को 255 वोट मिले, जबकि विपक्षी उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को 88 वोट हासिल हुए। कुल 349 सांसद मतदान के पात्र थे, जिनमें 343 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

यह चुनाव इसलिए ऐतिहासिक रहा क्योंकि 35 साल बाद पहली बार बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनाव में दो उम्मीदवार आमने-सामने थे। इससे पहले 1991 के बाद हुए राष्ट्रपति चुनावों में विपक्षी उम्मीदवार नहीं उतारता था या मुकाबला प्रभावी रूप से एकतरफा रहता था।

ओली अहमद कौन थे?

आलमगीर के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले ओली अहमद लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष हैं। उन्हें जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय विपक्षी गठबंधन ने उम्मीदवार बनाया था। हालांकि संसद में BNP और उसके सहयोगियों के पास दो-तिहाई बहुमत होने के कारण आलमगीर की जीत की संभावना पहले से ही काफी मजबूत थी।

फखरुल के लिए राष्ट्रपति पद तक का सफर

78 वर्षीय मिर्जा फखरुल लंबे समय से BNP के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। वह 2011 से 2016 तक पार्टी के कार्यवाहक महासचिव रहे और मार्च 2016 में उन्हें महासचिव की जिम्मेदारी स्थायी रूप से मिली। शेख हसीना के लंबे शासन के दौरान वह BNP के सबसे प्रमुख जमीनी नेताओं में से एक रहे।

BNP के सत्ता में लौटने के बाद प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान ने 13 अगस्त को फखरुल को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद फखरुल ने BNP महासचिव और पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था।

भारत के साथ रिश्तों को लेकर क्या है फखरुल का रुख?

फखरुल भारत के साथ संबंधों में टकराव के बजाय बातचीत और कूटनीति पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने भारत-बांग्लादेश संबंधों को जटिल बताते हुए भी कहा है कि मतभेदों के बावजूद दोनों देशों को सहयोग का रास्ता बंद नहीं करना चाहिए।

उनका राष्ट्रपति बनना भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि बांग्लादेश की नई BNP सरकार के साथ नई दिल्ली के संबंधों में कई संवेदनशील मुद्दे मौजूद हैं। फखरुल का सार्वजनिक रुख यह रहा है कि भारत के साथ विवादों को संघर्ष के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

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