

Japan Defence Minister Shinjiro Koizumi Delhi Visit: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और जापान के बीच रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए राजधानी दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी अपने दो दिवसीय भारत दौरे के दौरान आज, यानी 20 अगस्त को भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
यह रणनीतिक मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश एक मुक्त, खुले, सुरक्षित, लचीले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण की साझा सोच रखते हैं। आइए जानते हैं कि जापानी रक्षा मंत्री के इस दिल्ली दौरे का पूरा शेड्यूल क्या है और इस हाई-प्रोफाइल बैठक में किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा फोकस रहने वाला है।
जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के दिल्ली दौरे का कार्यक्रम काफी व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है:
सुबह 11:00 बजे: दिल्ली में उनके कार्यक्रमों की शुरुआत आर्मी पैवेलियन में पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ होगी, जिसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।
सुबह 11:30 बजे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और शिंजिरो कोइजुमी के बीच द्विपक्षीय बैठक शुरू होगी, जिसमें दोनों देशों के रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर गहन चर्चा होगी।
दोपहर 2:00 बजे: दोनों रक्षा मंत्रियों के लिए विशेष लंच का कार्यक्रम रखा गया है।
शाम 5:00 बजे: जापानी रक्षा मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बेहद खास और अहम मुलाकात करेंगे।
दिल्ली में राजनाथ सिंह से मिलने से ठीक एक दिन पहले, यानी 19 अगस्त को जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी मुंबई में थे। वहां उन्होंने वेस्टर्न नेवल कमांड का दौरा किया और भारतीय नौसेना की भूमिका, जिम्मेदारियों तथा ऑपरेशनल क्षमताओं को करीब से समझा।
मुंबई दौरे के दौरान कोइजुमी ने नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन से मुलाकात की। उन्हें वहां गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने नेवल डॉकयार्ड स्थित 'गौरव स्तंभ' पर पुष्पांजलि अर्पित की और भारत के शक्तिशाली स्वदेशी युद्धपोत INS Chennai का भी दौरा किया।
इस द्विपक्षीय रक्षा वार्ता में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
1. समुद्री सुरक्षा सहयोग: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल और गश्त को बढ़ाना।
2. रक्षा उपकरण और तकनीकी साझेदारी: जापान द्वारा रक्षा उपकरणों और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़े अपने कड़े नियमों में बदलाव किए जाने के बाद अब दोनों देशों के पास 'मेक इन इंडिया' के तहत संयुक्त रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते तलाशने का बड़ा मौका है।
3. भविष्य का रोडमैप: दोनों देशों के रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत और संस्थागत बनाने के लिए एक स्पष्ट भविष्य का रोडमैप तैयार करना।
शिंजिरो कोइजुमी का यह दौरा इसलिए भी काफी अहम है क्योंकि यह जापानी प्रधानमंत्री सना तकेइची की हालिया भारत यात्रा के कुछ ही हफ्तों बाद हो रहा है। हाल ही में भारत और जापान के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बातचीत में भी रक्षा और सुरक्षा सहयोग को हर हाल में और मजबूत करने पर सहमति बनी थी। कोइजुमी की यह यात्रा उसी कड़ी का अगला और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है, जो दोनों देशों के बीच लगातार गहराते रणनीतिक और रक्षा संबंधों को दर्शाती है।