इजराइल की अल-अक्सा मस्जिद (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

अल-अक्सा मस्जिद की पाबंदी पर मालदीव का कड़ा रुख… इजराइल की निंदा और शांति की वैश्विक अपील की

Al-Aqsa Restrictions: मालदीव ने अल-अक्सा मस्जिद को बंद करने की निंदा की और इजराइल को जवाबदेह ठहराने की मांग की। साथ ही ईरान के हमलों और क्षेत्रीय तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए शांति की अपील की है।

प्रिया सिंह

International Condemnation Of Al-Aqsa Closure: पवित्र रमजान के महीने में यरूशलेम से आई खबर ने पूरी दुनिया के मुस्लिम समुदाय को गहरे दुख में डाल दिया है। मालदीव सरकार ने इजराइल द्वारा अल-अक्सा मस्जिद के दरवाजे बंद करने के फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। सरकार का मानना है कि यह कदम केवल एक धार्मिक स्थल पर पाबंदी नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का सीधा अपमान है। इस कठिन समय में शांति और सुरक्षा की बहाली के लिए दुनिया भर से एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत है।

धार्मिक स्वतंत्रता पर गहरा आघात

मालदीव सरकार ने कहा कि अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है और यहां तक पहुंच रोकना गलत है। रमजान जैसे पाक महीने में श्रद्धालुओं को इबादत से वंचित करना जानबूझकर लोगों की भावनाओं को भड़काने वाला काम है। यह कार्रवाई न केवल मस्जिद की पवित्रता को कम करती है बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी स्पष्ट रूप से उल्लंघन करती है। सरकार ने दुनिया के सभी देशों से अपील की है कि इजराइल को इस अवहेलना के लिए कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में इजराइल की जवाबदेही तय करना अब वक्त की सबसे बड़ी मांग बन गई है। किसी भी धर्म के पवित्र स्थलों का सम्मान करना विश्व शांति के लिए अनिवार्य है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

क्षेत्रीय हमलों पर बढ़ती चिंता

मालदीव ने केवल इजराइल ही नहीं बल्कि ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए हमलों की भी जमकर आलोचना की है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे भाईचारे वाले देशों पर मिसाइल दागना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक कदम है। नागरिक इलाकों और तेल सुविधाओं को निशाना बनाना मानवता के खिलाफ है और जिनेवा संधियों के नियमों को तोड़ता है। हवाई अड्डों और अन्य रिहायशी क्षेत्रों में होने वाली हिंसा निर्दोष लोगों की जान को खतरे में डाल रही है। मालदीव ने अफसोस जताया कि इन हमलों के बावजूद अब तक खाड़ी देशों की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई। सरकार का मानना है कि इस तरह की हिंसा केवल क्षेत्र में तनाव और नफरत बढ़ाने का काम करती है।

शांति और कूटनीति की पुकार

इटली के राजदूत एंटोनियो बार्टोली ने भी इस युद्ध को रोकने के लिए बातचीत और कूटनीति के रास्ते को अपनाने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि इस संघर्ष में हजारों विदेशी नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है जिन्हें बचाना हमारी प्राथमिकता है। कूटनीतिक प्रयासों को तेज करके ही हम इस विनाशकारी युद्ध की आग को शांत करने में सफल हो सकते हैं।

वहीं चीन ने भी सभी देशों की प्रभुसत्ता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपनी पुरानी बात को फिर से दोहराया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी के अनुसार खाड़ी क्षेत्र का तनाव बहरीन जैसे छोटे देशों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। चीन हमेशा से विवादों को समझौते और शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का पक्षधर रहा है ताकि स्थिरता बनी रहे।

युद्धविराम की सामूहिक अपील

मालदीव सरकार ने सभी लड़ने वाले पक्षों से तुरंत युद्धविराम करने और हिंसा को पूरी तरह से बंद करने की गुजारिश की है। बढ़ती हिंसा ने शांति की हर संभावना को कमजोर कर दिया है जिससे आम नागरिक सबसे ज्यादा परेशान और दुखी हैं। क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब एक निर्णायक और कड़ा रुख अपनाना ही होगा।

मौजूदा हालात में नफरत की जगह आपसी समझ और सम्मान को बढ़ावा देना मानवता के लिए बहुत जरूरी हो गया है। अगर समय रहते कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष एक बड़ी तबाही का रूप ले सकता है। हम सबको मिलकर एक ऐसी दुनिया बनाने की कोशिश करनी चाहिए जहां धर्म और सीमाएं सुरक्षित रहें।

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