अमेरिकी सेना के गिरफ्त में निकोलस मादुरो। इमेज-सोशल मीडिया 
विदेश

मादुरो अमेरिका के पहले शिकार नहीं, 3 और नेताओं के साथ कर चुका है ऐसा

Nicolas Maduro: अमेरिका वेनेजुएला के राष्ट्रपति के अलावा 3 अन्य नेताओं को सैन्य हस्तक्षेप से हटा चुका है। अपनी मनमर्जी से इन्हें सजा दिया। एक केस तो बिल्कुल वेनेजुएला से मिलता-जुलता है।

रंजन कुमार

Nicolas Maduro News: अमेरिका ने भारी बमबारी के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है। अमेरिका ने यह भी बताया है कि निकोलस को पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ देश से बाहर ले जाया गया है। वहीं, वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पैड्रिनो लोपेज हार नहीं मानने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी आक्रामकता के खिलाफ उनका देश जीत हासिल करेगा।

बता दें, यह कोई पहली बार नहीं, जब अमेरिका ने किसी देश के राष्ट्रपति को निशाना बनाया हो। पहले भी 3 बार ऐसा कर चुका है। उन्हें सजा भी दे चुका है।

सद्दाम हुसैन

1980 के दशक में सद्दाम हुसैन ने इराक-ईरान युद्ध में खुलकर अमेरिका का साथ दिया। मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे अहम सहयोगी बनकर उभरे थे, मगर अमेरिका के साथ उनकी दोस्ती अधिक दिनों तक नहीं चल सकी। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन परमाणु बम बनाने की कोशिश में है। इससे आक्रोशित होकर अमेरिका ने 20 मार्च 2003 को इराक पर हमला कर दिया। करीब 9 महीने बाद 13 दिसंबर 2003 को अमेरिका की सेना ने सद्दाम हुसैन को पकड़ा। इराक की अदालत से सजा मिलने के बाद 30 दिसंबर 2006 को फांसी दे दी गई।

जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज

2022 के फरवरी महीने में अमेरिका ने निकोलस मादुरो की तर्ज पर ही होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को पकड़ा गया था। अमेरिकी खुफिया एजेंटों और सेना के अभियान के बाद तेगुसिगाल्पा स्थित आवास से हर्नांडेज को पकड़ लिया गया था। एक महीने बाद अप्रैल में जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को अमेरिका प्रत्यार्पित किया गया। वहां उन पर भ्रष्टाचार और मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में मुकदमा चला गया। दो महीने बाद जून में जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को 45 वर्षों की सजा सुना दी गई। पिछले साल 1 दिसंबर को डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें क्षमा दान दे दिया है।

मैनुअल नोरीगा

साल 1889 में अमेरिका ने लैटिन अमेरिकी देश पनामा पर आक्रमण किया था। वहां के सैन्य नेता मैनुअल नोरीगा को पद से हटाया था। उन पर भी तानाशाही और नशा तस्करी के आरोप लगाए थे। 1988 में अमेरिका ने मादुरो की तरह ही मैनुअल नोरीगा के खिलाफ एक मुकदमा मियामी में चलाया था। यह केस भी ड्रग्स तस्करी से संबंधित था। साल 2010 तक मैनुअल नोरीगा को अमेरिकी जेल में रखा। इसके बाद फ्रांस भेजा गया। बाद में फ्रांस से अपने वतन पनामा लौटे, लेकिन 2017 में जेल में आखिरी सांस ली।

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