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विदेश

होर्मुज संकट के बावजूद LNG टैंकरों की मांग में भारी उछाल, आखिर क्यों जहाजों के लिए मची है होड़?

LNG Tanker Demand: ईरान-अमेरिका जंग में होर्मुज की नाकेबंदी के बीच लिक्विफाइड नेचुरल गैस टैंकरों की मांग तेजी से बढ़ी है। अमेरिका और अन्य देशों में बढ़ते उत्पादन ने शिपिंग बाजार में हलचल पैदा कर दी है।

अमन उपाध्याय

LNG Tanker Demand Increase:  ईरान-अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है। खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई रुकने के बावजूद, प्राकृतिक गैस ढोने वाले लिक्विफाइड नेचुरल गैस कैरियर (LNGC) जहाजों की मांग में तेजी देखी जा रही है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2024 में इन जहाजों के नए ऑर्डरों में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।

दक्षिण कोरिया और चीन के शिपयार्ड्स में बढ़े ऑर्डर

शिपिंग उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, साल 2025 में आई गिरावट के बाद अब जहाजों की मांग फिर से बढ़ने लगी है। इस साल की पहली तिमाही में ही 35 नए LNGC जहाजों के निर्माण के कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं जो कि लगभग पिछले पूरे साल (2025) में मिले 37 ऑर्डरों के बराबर है। वर्तमान में दक्षिण कोरिया और चीन के शिपयार्ड्स को ये ऑर्डर सबसे ज्यादा मिल रहे हैं। गौरतलब है कि एक आधुनिक LNG टैंकर की लागत 25 से 26 करोड़ डॉलर के बीच होती है और इसे तैयार होने में तीन साल से अधिक का समय लगता है।

अमेरिका और नए सप्लायर्स की बढ़ती हिस्सेदारी

इस मांग के पीछे एक मुख्य कारण अमेरिका, अफ्रीका, कनाडा और अर्जेंटीना जैसे देशों में LNG उत्पादन का बढ़ना है। अकेले अमेरिका से अगले 3 से 4 वर्षों में 12 करोड़ टन प्रतिवर्ष से ज्यादा नई सप्लाई बाजार में आने की उम्मीद है। 'वुड मैकेंजी' के विश्लेषकों का कहना है कि ग्लोबल मार्केट में अमेरिका की बढ़ती हिस्सेदारी से शिपिंग की जरूरतें बढ़ रही हैं, क्योंकि अमेरिकी गैस 'फ्री-ऑन-बोर्ड' आधार पर बेची जाती है, जिससे जहाज लंबी दूरी की यात्राओं में व्यस्त रहते हैं।

पुराने जहाजों की विदाई और नए उत्सर्जन नियम

ईंधन दक्षता और पर्यावरण नियमों (IMO) के कारण पुराने जहाजों को तेजी से बेड़े से हटाया जा रहा है। साल 2025 में रिकॉर्ड 15 पुराने जहाजों को स्क्रैप किया गया। अब बाजार ऐसे 'ड्यूल-फ्यूल' जहाजों की ओर बढ़ रहा है जो LNG पर भी चल सकते हैं और कम प्रदूषण फैलाते हैं। वर्तमान में दुनिया भर में 700 से अधिक LNG कैरियर जहाज हैं जो सालाना 40 करोड़ टन से ज्यादा गैस की सप्लाई करते हैं।

कतर और यूएई की रणनीतिक तैयारी

होर्मुज संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने के बावजूद कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं। कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। अगले कुछ वर्षों में 70 से 80 नए जहाज अपने बेड़े में जोड़ने की योजना बना रहा है।

वहीं, UAE की कंपनी ADNOC अगले 36 महीनों में अपने बेड़े को दोगुना करने की तैयारी में है। हालांकि, युद्ध के कारण सप्लाई बाधित होने से एशियाई खरीदार अब अटलांटिक क्षेत्र की ओर रुख कर रहे हैं जिससे जहाजों की यात्रा की दूरी और बढ़ गई है।

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