चीन, तनाव के बीच जापान ने भेजा दूत, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

कर सकते हैं सैन्य कार्रवाई! टोक्यों की चेतावनी से तिलमिलाया चीन, तनाव के बीच जापान ने भेजा दूत

Japan China Tension: जापान ने बढ़ते तनाव के बीच अपने वरिष्ठ अधिकारी को चीन भेजा है। प्रधानमंत्री ताकाइची की ताइवान टिप्पणी से उपजे विवाद को शांत करने और रिश्तों में सुधार की कोशिशें जारी हैं।

अमन उपाध्याय

Beijing Tokyo Diplomatic Talks: चीन और जापान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयास के तहत टोक्यो ने सोमवार को अपने वरिष्ठ अधिकारी को बीजिंग भेजा। माना जा रहा है कि यह दौरा हाल के दिनों में बिगड़े संबंधों के बीच संवाद का रास्ता बनाए रखने और विवाद को शांत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

क्योदो समाचार एजेंसी द्वारा साझा किए गए वीडियो फुटेज में जापानी विदेश मंत्रालय के एशिया और ओशिनिया ब्यूरो के महानिदेशक मासाकी कनाई को बीजिंग पहुंचते हुए दिखाया गया। उनका उद्देश्य चीनी विदेश मंत्रालय में अपने समकक्ष लियू जिनसोंग से मुलाकात कर मौजूदा तनाव पर चर्चा करना है।

जापान जाने से बचने की सलाह

तनाव की शुरुआत जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की उस टिप्पणी से हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि ताइवान में संकट का मतलब जापान में संकट है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि ताइवान पर चीन के किसी संभावित हमले की स्थिति में जापान सामूहिक आत्मरक्षा के तहत सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। यह बयान बीजिंग को कड़ा संदेश देने जैसा माना गया और चीन ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अपने नागरिकों से जापान जाने से बचने की सलाह जारी कर दी।

देशों के रिश्तों को और नुकसान

जापान टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, मासाकी कनाई अपने चीनी समकक्ष को समझाने की कोशिश करेंगे कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी जापान की सुरक्षा नीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं है। टोक्यो यह स्पष्ट करना चाहता है कि वह क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और बीजिंग को ऐसे किसी भी कदम से बचने की सलाह देगा जो दोनों देशों के रिश्तों को और नुकसान पहुंचा सकता है।

जापान की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था असर

इस विवाद को और संवेदनशील बना देता है ताइवान का भू-स्थान। यह जापान के सबसे पश्चिमी द्वीपों से केवल 110 किलोमीटर दूर स्थित है और उन महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के पास है जिनसे होकर जापान के लिए तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में ताइवान में किसी भी बड़े सैन्य तनाव का असर जापान की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

जापान टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन के साथ “बातचीत के कई माध्यम खुले हैं” और टोक्यो लगातार बीजिंग से उचित कदम उठाने की अपील करता रहा है।

हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय का रवैया अभी भी ठंडा बना हुआ है। उसने साफ किया है कि चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग की साने ताकाइची से दक्षिण अफ्रीका में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की कोई योजना नहीं है। यह स्पष्ट संकेत है कि बीजिंग अभी टोक्यो के स्पष्टीकरण को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।

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