ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

Iran US Conflict: शांति समझौते का उल्लंघन, खामेनेई बोले- ट्रंप के हस्ताक्षर की कोई कीमत नहीं

Iran US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका पर शांति समझौते के बड़े उल्लंघन का आरोप लगाकर राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर को अमान्य बताया।

प्रिया सिंह

Iran US Conflict Trump Signature Meaningless On MOU Says Mojtaba Khamenei: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भयंकर सैन्य हमलों के कारण मध्य पूर्व में गंभीर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हाल ही में दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण शांति समझौता हुआ था जिसे अब अमेरिका ने तोड़ दिया है। ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि उसने इस समझौते का पूरी तरह से उल्लंघन किया है। खामेनेई ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर अपना असली और गैर-भरोसेमंद चेहरा पूरी दुनिया को दिखा दिया है।

खामेनेई ने कहा कि 18 जून को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और डोनाल्ड ट्रंप ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन अमेरिका के इस धोखे ने साबित कर दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर कितने अमूल्य और अमान्य हैं। उन्होंने सख्त चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपनी युद्ध भड़काने वाली हरकतें तुरंत नहीं रोकीं तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अमेरिका का यह कदम उसके वादे तोड़ने और झूठ बोलने के बुरे अनुभव का एक बहुत ही पक्का और बड़ा सबूत बन गया है।

समझौते की अहम शर्तें

ईरान और अमेरिका की ओर से हस्ताक्षर किए गए इस एमओयू के तहत एक महत्वपूर्ण लक्ष्य तय किया गया था। दोनों देशों के बीच 60 दिनों के अंदर आखिरी शांति समझौते के लिए विस्तृत बातचीत पूरी होने की उम्मीद थी। लेकिन अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ कई राउंड हवाई हमले करके इस पूरी बातचीत को रोक दिया है। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और अन्य जगहों पर जवाबी हमले शुरू किए हैं।

ईरान का नया और सख्त रुख

ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने भी कड़ा बयान दिया है। उन्होंने शनिवार को बताया कि ईरान ने अब अमेरिका के साथ एमओयू के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना बंद कर दिया है। काजम ने सरकारी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि वाशिंगटन ने समझौते के तहत अपने सभी कमिटमेंट्स तोड़ दिए हैं। अब ईरान अपना बचाव करने पर ध्यान दे रहा है और फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है।

अमेरिकी हमलों का मुख्य कारण

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार अमेरिका ने पिछले सप्ताह ईरान के दक्षिणी हिस्सों में स्थित कई सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए। वाशिंगटन का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरानी क्षमता को कमजोर करना था। अमेरिका को पहले ही जवाब मिल चुका है कि इन आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों से कोई भी सकारात्मक परिणाम हासिल नहीं होगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि हमारे सामने अपने देश की मजबूती से रक्षा करने की सबसे बड़ी और अहम चुनौती है।

खाड़ी देशों में भीषण हमले

इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और घातक ड्रोन हमले किए। वहीं कुवैत और बहरीन ने शनिवार को दावा किया कि उनके वायु रक्षा तंत्र ने ईरान के ताजा हवाई हमलों को नाकाम कर दिया। कुवैत में एक अहम तेल प्रतिष्ठान के साथ-साथ बिजली उत्पादन और समुद्री जल को मीठा बनाने वाले संयंत्र को भी निशाना बनाया गया। दोनों देशों के बीच जारी इस भारी तनाव से पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और भी ज्यादा भड़कने का बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

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