Israel Petrochemical Plant Attack News In Hindi: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अप्रैल में हुए युद्धविराम के ठीक दो महीने बाद, 7 जून को ईरान और इजरायल के बीच सीधी सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो गई है। इजरायली वायुसेना ने सोमवार की सुबह ईरान के आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।
लेबनान में हिज्बुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने रविवार रात को इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने कड़ा पलटवार करते हुए ईरान के खुजेस्तान प्रांत स्थित माहशहर को निशाना बनाया। यहां की 'कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी' पर इजरायली मिसाइलों ने सटीक हमला किया, जिससे प्लांट के एक बड़े हिस्से को काफी नुकसान पहुंचा है। माहशहर ईरान का एक प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा केंद्र है, जो देश की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाता है। इजरायली सेना ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा है कि उनके विमानों ने परिसर के कई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है।
इजरायल की यह कार्रवाई केवल एक प्लांट तक सीमित नहीं रही। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी तेहरान, तबरीज और इस्फहान जैसे प्रमुख शहरों में भी जोरदार धमाके सुने गए हैं। आईडीएफ का दावा है कि उन्होंने पश्चिमी और मध्य ईरान में स्थित कई सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। वहीं, ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड ने आरोप लगाया है कि इजरायल ने इन हमलों में अत्याधुनिक एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है।
आईआरजीसी ने एक बयान जारी कर दावा किया है कि उनके मिसाइल हमलों ने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि यह ऑपरेशन इजरायली शासन द्वारा ईरानी रडार साइटों पर किए गए हमलों का करारा जवाब था। हालांकि, इजरायली सेना ने जानकारी दी है कि सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया।
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मौजूदा नाजुक स्थिति को देखते हुए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की एक अहम बैठक बुलाई है। भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होने वाली इस बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक में ईरान के हमलों के प्रभाव, इजरायल की अगली जवाबी कार्रवाई और भविष्य की सैन्य रणनीति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।